

गंगा नदी में नाव पर इफ़्तार पार्टी आयोजित करने के आरोप में जिन 14 मुस्लिम पुरुषों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था, उन्हें वाराणसी की एक अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव ने यह आदेश पारित किया।
यह विवाद तब खड़ा हुआ, जब नदी में नाव पर कुछ लोगों के रोज़ा तोड़ते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की वाराणसी शहर इकाई के अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज की गई, जिसमें उन लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया था। FIR में कहा गया था कि उन लोगों ने चिकन बिरयानी खाई और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंक दिया।
शुरुआत में उन लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298 (पूजा स्थल को अपवित्र करना), 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य), 196(1)(B) (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 270 (सार्वजनिक उपद्रव), 279 (सार्वजनिक जल स्रोत या जलाशय के पानी को दूषित करना), और 223(B) (किसी लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करना) के तहत, साथ ही जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बाद में पुलिस ने उन पर और भी गंभीर आरोप जोड़े, जिनमें BNS की धारा 308(5) (जबरन वसूली) के तहत आरोप भी शामिल था।
यह आरोप तब जोड़ा गया, जब नाव के मालिकों ने आरोप लगाया कि आरोपी लोगों ने उनसे ज़बरदस्ती नाव छीन ली थी।
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
Ganga boat iftar: Varanasi Court remands all 14 accused to judicial custody for 14 days