

गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (GHCAA) ने सोमवार को फैसला किया कि वे 5 और 6 अक्टूबर को कोर्ट के काम से दूर रहेंगे। वे गुजरात रेंट बिल, 2026 के प्रावधानों का विरोध कर रहे वकीलों के समर्थन में ऐसा करेंगे।
यह फ़ैसला सोमवार सुबह गुजरात हाईकोर्ट के गेट नंबर 2 पर हुई एक खास आम बैठक (Extraordinary General Body meeting) में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता GHCAA के प्रेसिडेंट और सीनियर एडवोकेट यतिन ओज़ा ने की।
GHCAA ने कहा कि यह फ़ैसला सिटी सिविल कोर्ट और स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के समर्थन में और बार काउंसिल ऑफ़ गुजरात (BCG) द्वारा पास किए गए प्रस्ताव के अनुसार लिया गया।
यह विरोध गुजरात रेंट बिल, 2026 के कुछ प्रावधानों को लेकर शुरू हुआ, जिसमें किराए से जुड़े विवादों के निपटारे को अदालतों से हटाकर रेवेन्यू अधिकारियों को सौंपने की बात कही गई है। यह बिल गुजरात विधानसभा से पास हो चुका है और अभी गवर्नर की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है।
बिल में डिप्टी कलेक्टर और एडिशनल कलेक्टर जैसे अधिकारियों को ऐसे विवादों की सुनवाई करने और उन पर फ़ैसला लेने का अधिकार देने का प्रावधान है।
अहमदाबाद भर के वकीलों ने पिछले हफ़्ते इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ विरोध शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि सिटी सिविल और स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट के वकीलों ने विरोध के तौर पर काम से दूरी बनाए रखी और भद्रा कोर्ट कॉम्प्लेक्स का रास्ता रोक दिया था।
इसके बाद BCG ने 3 अक्टूबर को एक खास आम बैठक बुलाई और विरोध को अपना समर्थन दिया। उसने फ़ैसला किया कि गुजरात भर के वकील 5 अक्टूबर से लेकर इस मुद्दे के संतोषजनक समाधान तक अदालतों, ट्रिब्यूनलों, न्यायिक और अर्ध-न्यायिक अधिकारियों और रेवेन्यू फ़ोरम की कार्यवाही से दूर रहेंगे।
इसके अलावा, BCG के प्रस्ताव में कहा गया कि किराए से जुड़े विवादों पर फ़ैसला लेने की शक्ति को न्यायिक अधिकारियों से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने से वकीलों, मुक़दमेबाज़ों और आम जनता पर असर पड़ेगा। इसने प्रशासनिक अधिकारियों के काम के बोझ और किराए से जुड़े विवादों में सबूतों को रिकॉर्ड करने और उनका मूल्यांकन करने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।
BCG के चेयरमैन पीडी पटेल ने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को बताया कि सरकार ने किराए से जुड़े विवादों के निपटारे का काम न्यायपालिका से हटाकर ऐसी नौकरशाही को सौंप दिया है, जिस पर पहले से ही काम का बहुत ज़्यादा बोझ है।
काउंसिल ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कानून मंत्री के साथ बैठक की मांग की है ताकि बिल में बदलाव करके किराए से जुड़े विवादों पर फ़ैसला लेने की शक्ति न्यायिक अधिकारियों को वापस दिलाई जा सके।
GHCAA ने कहा कि बिल के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध के बीच सिटी सिविल कोर्ट और स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए दो दिन तक काम से दूर रहने का फ़ैसला किया गया था।
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