

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार के वन विभाग को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि पिछले एक साल में उसने दिल्ली में पेड़ काटने की अनुमति कितनी बार दी है [श्याम किशन सराफ बनाम वन विभाग (GNCTD) और अन्य]।
जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे श्याम किशन सराफ नाम के एक व्यक्ति ने दायर किया था। इस याचिका में यह चिंता जताई गई थी कि दिल्ली में वन विभाग से उचित अनुमति लिए बिना ही मनमाने ढंग से पेड़ों की कटाई की जा रही है।
दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 की धारा 8 के तहत, दिल्ली में वन विभाग से पहले से अनुमति लिए बिना पेड़ों को काटना प्रतिबंधित है।
अब अदालत ने इस बारे में जानकारी मांगी है कि 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 के बीच दिल्ली में कितनी बार पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई।
8 अप्रैल के आदेश में कहा गया है, "प्रतिवादी-प्राधिकरण [वन विभाग] एक हलफनामा (affidavit) भी रिकॉर्ड पर रखे, जिसमें यह बताया जाए कि 01.04.2025 से 31.03.2026 के बीच दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 की धारा 8 के तहत कितनी अनुमतियां प्रदान की गई हैं।"
कोर्ट ने सराफ की पिटीशन में उठाई गई बड़ी चिंताओं पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCD) से भी जवाब मांगा है।
खास तौर पर, कोर्ट ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से यह बताने को कहा है कि वह गैर-कानूनी पेड़ों की कटाई की चिंताओं से कैसे निपटता है।
कोर्ट ने निर्देश दिया, "रेस्पोंडेंट-अथॉरिटी [फॉरेस्ट डिपार्टमेंट] को यह बताने दें कि पिटीशनर की शिकायत पर कैसे गौर किया जा रहा है। रेस्पोंडेंट-अथॉरिटी को यह भी बताना होगा कि ऐसी ही शिकायतों से निपटने के लिए कोई सिस्टम मौजूद है या नहीं।"
सराफ ने दिल्ली के एक इलाके में पेड़ों को बचाने के लिए कोर्ट से दखल देने की मांग की है। उन्होंने इस मामले में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की तरफ से कोई कार्रवाई न करने का हवाला देते हुए कोर्ट में अर्जी दी है।
मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
सराफ की तरफ से वकील ज़ैन हैदर और मोहम्मद तनवीर अली पेश हुए, जो खुद भी पेश हुए।
दिल्ली सरकार की तरफ से पैनल काउंसिल (सिविल) वैशाली गुप्ता और वकील कार्तिक शर्मा पेश हुए।
MCD की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल संजय वशिष्ठ और वकील सिद्धार्थ गोस्वामी पेश हुए।
[आदेश पढ़ें]
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
How many times was tree cutting allowed in past year? Delhi High Court asks forest department