पासपोर्ट जारी करने के लिए महबूबा मुफ्ती द्वारा दायर याचिका पर जम्मू-कश्मीर HC ने केंद्र सरकार, जे&के यूटी से मांगा जवाब
Mehbooba Mufti

पासपोर्ट जारी करने के लिए महबूबा मुफ्ती द्वारा दायर याचिका पर जम्मू-कश्मीर HC ने केंद्र सरकार, जे&के यूटी से मांगा जवाब

मुफ्ती का पासपोर्ट 31 मई, 2019 को समाप्त हो गया था और उन्होंने दिसंबर 2020 में पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन आज तक जारी नहीं किया गया है।

जम्मू-कश्मीर (J & K) हाईकोर्ट ने सोमवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा सरकार और पुलिस अधिकारियों को उन्हे पासपोर्ट जारी करने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश J & K से जवाब मांगा

न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मुफ्ती की याचिका पर उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया, जिसमें मुफ्ती द्वारा केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पुलिस सत्यापन के लिए उनके पासपोर्ट आवेदन को संसाधित करने के लिए अधिकारियों की ओर से विफलता का आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिट याचिका की पेंडेंसी पुलिस एजेंसी के लिए सत्यापन में तेजी लाने के लिए कोई बाधा नहीं बनेगी।

याचिका के अनुसार, मुफ्ती का पासपोर्ट 31 मई, 2019 को समाप्त हो गया था।

इसलिए, पासपोर्ट के नवीकरण के लिए आवेदन किया गया था, जो कि पासपोर्ट अधिकारी द्वारा 11 दिसंबर, 2020 को प्राप्त किया गया था।

आवेदन की प्राप्ति के बाद, सभी मामलों में पूर्ण, पासपोर्ट अधिकारी ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिला श्रीनगर से पुलिस सत्यापन की मांग की।

चूंकि, पुलिस सत्यापन पूरे एक महीने मे भी नहीं हुआ था, इसलिए उसने एसएसपी को यह कहते हुए एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, पुलिस सत्यापन 21 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है।

मुफ्ती द्वारा अपनी याचिका में दावा किये गए अभ्यावेदन को 13 फरवरी को एसएसपी द्वारा प्राप्त किया गया था।

पासपोर्ट अधिकारी के पास पुलिस सत्यापन को अग्रेषित नहीं करने पर ADGP और SSP की ओर से निष्क्रियता कानूनन गलत है। यहां प्रस्तुत किया गया है कि प्रशासनिक विलंब मनमानी और विधि के नियम के खिलाफ है। मुफ्ती ने कहा, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट सौंपना प्राधिकरण के विवेक पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

मुफ्ती के वकील, जहाँगीर इकबाल गनाई और हुमायरा शफी के अधिवक्ताओं ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पासपोर्ट अधिकारी की वेबसाइट पर ट्रैकिंग सुविधा का लाभ उठाते हुए एसपी कार्यालय, जिला श्रीनगर के तहत संबंधित थाने में भौतिक सत्यापन के लिए लंबित पासपोर्ट की स्थिति के बारे में पता चला।

याचिकाकर्ता ने पुलिस कार्यालय को पासपोर्ट कार्यालय को अग्रेषित करने के अनुरोध के साथ 13 फरवरी, 2021 को पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया, लेकिन आज तक पासपोर्ट कार्यालय के उपलब्ध पोर्टल पर याचिकाकर्ता के पासपोर्ट की स्थिति समान है। इसलिए, याचिकाकर्ता के पास राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

मुफ्ती ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक पहलू है और कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार इसे मना नहीं किया जा सकता है।

उत्तरदाताओं को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की सुनवाई 23 मार्च को फिर से होगी।

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Jammu and Kashmir High Court seeks response from Central government, UT of J&K on plea filed by Mehbooba Mufti for issuance of passport

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