जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले CAT के आदेश को रद्द कर दिया

अदालत ने कहा कि वकीलों और जजों के बीच तीखी बहस होने पर वकीलों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही नहीं शुरू की जानी चाहिए।
J&K High Court, Jammu Bench
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने हाल ही में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के एक आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश के तहत वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर इकबाल गनाई पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उन पर आरोप था कि वे वर्चुअल कार्यवाही के दौरान बिना यूनिफॉर्म के पेश हुए और उन्होंने "अदालत के बारे में" कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी [जहांगीर इकबाल गनाई बनाम मोहम्मद अमीन डार और अन्य]।

जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस एम.ए. चौधरी की बेंच ने कहा कि यह आदेश 'नैसर्गिक न्याय' (natural justice) के सिद्धांतों का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए पारित किया गया था।

अदालत ने कहा, "हमने चुनौती दिए गए आदेश को देखा है और पाया है कि यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह से उल्लंघन है। इसमें वरिष्ठ वकील पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया गया, जबकि उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। और यह सब एक बहुत ही मामूली मामले में किया गया, जिसे खुली अदालत में ही सुलझाया जा सकता था।"

Justice Sanjeev Kumar and Justice M A Choudhary
Justice Sanjeev Kumar and Justice M A Choudhary

अदालत ने यह आदेश गनाई की उस रिट याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने CAT (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) की जम्मू बेंच द्वारा 07 अक्टूबर को पारित आदेश को चुनौती दी थी।

13 अक्टूबर को, अदालत ने मध्यस्थता के जरिए इस विवाद को सुलझाने की इच्छा जताई थी और ट्रिब्यूनल के दोनों सदस्यों तथा वरिष्ठ वकील को 21 अक्टूबर को अपने चैंबर में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।

हालांकि, जब 21 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई हुई, तो गनाई तो मौजूद थे, लेकिन ट्रिब्यूनल के सदस्य कई बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं हुए। बाद में पारित आदेश में अदालत ने कहा,

"ऐसा लगता है कि ट्रिब्यूनल के सदस्य सहयोग नहीं करना चाहते हैं।"

अदालत ने कहा कि बहस के दौरान वकीलों (बार) और जजों (बेंच) के बीच तीखी नोक-झोंक होना कोई असामान्य बात नहीं है।

अदालत ने आगे कहा, "हालांकि, बेंच को इस स्थिति को इतना नहीं बढ़ाना चाहिए कि वकीलों के खिलाफ अवमानना ​​(contempt) की कार्यवाही शुरू करनी पड़े या उन पर कोई जुर्माना लगाना पड़े।"

अदालत ने यह भी कहा कि अगर ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने संयम और परिपक्वता दिखाई होती, तो ऐसी अप्रिय स्थिति पैदा ही नहीं होती, जिसके कारण वरिष्ठ वकील को अवमानना ​​का नोटिस जारी करना पड़ा।

साथ ही, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि वकीलों, विशेष रूप से वरिष्ठ वकीलों की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अदालत की गरिमा और मर्यादा बनाए रखें।

अदालत ने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विचारों में मामूली मतभेद इतने न बढ़ जाएं कि बार और बेंच के बीच दूरियां पैदा हो जाएं और माहौल खराब हो जाए।

ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द करते हुए बेंच ने कहा, "इस मामले में ज्यादा कुछ कहे बिना, हम इसे यहीं समाप्त करना चाहते हैं।"

[आदेश पढ़ें]

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J&K High Court quashes CAT order imposing ₹10,000 cost on senior advocate

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