केरल हाईकोर्ट ने समझौता होने के बाद निविन पॉली और एब्रिड शाइन के खिलाफ दर्ज 1.9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया

अदालत ने फिल्म निर्माता पी.एस. शमनास के खिलाफ दर्ज जालसाजी के एक अलग मामले को भी खारिज कर दिया; शमनास ने ही पॉली और शाइन के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी।
Nivin Pauly and Abrid Shine
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केरल उच्च न्यायालय ने फिल्म 'एक्शन हीरो बीजू 2' से जुड़े 1.9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में, मलयालम फिल्म अभिनेता निविन पॉली और निर्देशक एब्रिड शाइन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है [एब्रिड शाइन बनाम केरल राज्य व अन्य, और इससे जुड़ा मामला]।

न्यायमूर्ति पीवी बालकृष्णन ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने देखा कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया है और अब उन्हें एक-दूसरे से कोई शिकायत नहीं है।

अदालत ने शिकायतकर्ता और फिल्म निर्माता पीएस शमनस के खिलाफ दर्ज एक अलग आपराधिक मामले को भी रद्द कर दिया। उन पर आरोप था कि उन्होंने केरल फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स में जमा किए गए दस्तावेजों में पॉली के हस्ताक्षर जाली तरीके से किए थे।

अदालत ने आगे कहा, "मेरा मानना ​​है कि याचिकाकर्ता और दूसरे प्रतिवादी ने उन विवादों को आपसी सहमति से सुलझा लिया है, जिनकी वजह से यह मामला दर्ज हुआ था। इससे यह भी पता चलता है कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और इनका समाज पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ता है। इसके अलावा, मुझे लगता है कि इस मामले को आगे चलाने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता के दोषी ठहराए जाने की संभावना बहुत कम है।"

Justice PV Balakrishnan
Justice PV Balakrishnan

अभिनेता और निर्देशक के खिलाफ धोखाधड़ी का यह मामला शमनास की एक शिकायत से शुरू हुआ। शमनास का आरोप था कि उन्होंने 'महावीर्यार' (जिसका निर्देशन शाइन ने किया था और जिसमें पॉली ने अभिनय किया था) नाम की फिल्म में हुए नुकसान के बाद, इसके सीक्वल प्रोजेक्ट में लगभग 1.9 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

शमनास का दावा है कि उन्हें आधिकारिक निर्माता के अधिकार और मुनाफे में हिस्सा देने का वादा किया गया था। लेकिन बाद में उनके साथ धोखा हुआ, क्योंकि उनकी सहमति के बिना ही फिल्म का टाइटल और अधिकार दुबई की एक कंपनी को 5 करोड़ रुपये में बेच दिए गए।

उनकी शिकायत के आधार पर, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (समान इरादा) के तहत एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

इसके बाद पॉली ने भी एक अलग शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि शमनास ने दस्तावेजों पर उनके जाली हस्ताक्षर किए हैं। इस शिकायत के आधार पर शमनास के खिलाफ भी एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

अगस्त 2025 में, उच्च न्यायालय ने पॉली और शाइन को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी।

बाद में, दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और वे आपराधिक कार्यवाही को रद्द कराने के लिए अदालत पहुंचे।

सरकारी वकील ने पुष्टि की कि यह समझौता असली है।

समझौते और आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और पॉली, शाइन तथा शमनास के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया।

शाइन की ओर से वकील एस. राजीव, वी. विनय, एमएस अनीर, सरथ केपी, अनिलकुमार सीआर, केएस किरण कृष्णन, दीपा वी, आकाश चेरियन थॉमस और आजाद सुनील पेश हुए।

पॉली की ओर से वकील मिलु दंडपाणि पेश हुए।

शमनास की ओर से वकील एस. मोहम्मद अल राजी और थजुना मारिया फ्रांसिस पेश हुए।

[आदेश पढ़ें]

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Kerala High Court quashes ₹1.9 crore cheating case against Nivin Pauly, Abrid Shine after settlement

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