उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय मे कुल 1113 मे से 80 महिला जज: महिलाओ के लिए आरक्षण पर कानून मंत्री ने लोकसभा मे दिया जवाब

केंद्र ने न्यायिक नियुक्तियों की अनुसंशा करते हुए एस, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों और महिलाओं उम्मीदवारों पर विधिवत विचार करने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह किया गया है।
उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय मे कुल 1113 मे से 80 महिला जज: महिलाओ के लिए आरक्षण पर कानून मंत्री ने लोकसभा मे दिया जवाब

केंद्रीय कानून मंत्री आरएस प्रसाद ने बुधवार को संकेत दिया कि वर्तमान में न्यायपालिका में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की कोई योजना नहीं है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार न्यायिक नियुक्तियों के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के उम्मीदवारों पर विचार करने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह कर रही है।

विभिन्न उच्च न्यायालयों में कुल 1,113 न्यायाधीश हैं जिसमें 34 न्यायधीश सुप्रीम कोर्ट के शामिल हैं। इनमें से केवल 80 महिला जज हैं यह कुल न्यायधीशों की संख्या का 7.9% है, कानून मंत्री के जवाब के अनुसार।

Number of Female Judges out of the Sanctioned Strength of Judges, as per the Law Minister's reply
Number of Female Judges out of the Sanctioned Strength of Judges, as per the Law Minister's reply

सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और अधीनस्थ न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की संख्या पर पूछे गए सवालों के जवाब में यह बताया गया।

आगे कहा गया, "क्या सरकार न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए आरक्षण लागू करने पर विचार करेगी?"

इस आधार पर सरकार की प्रतिक्रिया इस प्रकार है:

"उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 के तहत की जाती है। ये लेख महिलाओं सहित किसी भी जाति या व्यक्ति के वर्ग के लिए आरक्षण प्रदान नहीं करते हैं। सरकार, हालांकि, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजते समय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और महिलाओं से संबंधित उपयुक्त उम्मीदवारों पर विचार किया जाए।”
केंद्रीय कानून मंत्री

जहां तक अन्य प्रश्नों का संबंध है, कानून मंत्री ने कहा है कि 1 सितंबर, 2020 को न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निम्नानुसार है:

  • सुप्रीम कोर्ट में 2 महिला न्यायधीश हैं

  • विभिन्न उच्च न्यायालयों में 78 महिला न्यायाधीश हैं।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में देश में सबसे अधिक महिला न्यायाधीश हैं, जिसमें कुल 85 न्यायाधीशों में से 11 महिला न्यायाधीश हैं। मद्रास उच्च न्यायालय मे 75 न्यायाधीशों में से 9 महिला न्यायाधीश है।

कानून मंत्री के जवाब के अनुसार, उच्च न्यायालयों में महिला न्यायधीशों की अव्यवस्था इस प्रकार है:

  • इलाहाबाद: 160 न्यायाधीशों में से 6 महिला न्यायाधीश

  • आंध्रप्रदेश: 37 न्यायाधीशों में से 4 महिला न्यायाधीश

  • बॉम्बे: 94 न्यायाधीशों में से 8 महिला न्यायाधीश हैं

  • कलकत्ता: 72 न्यायाधीशों में से 5 महिला न्यायाधीश

  • छत्तीसगढ़: 22 न्यायाधीशों में से 2 महिला न्यायाधीश

  • दिल्ली: 60 न्यायाधीशों में से 8 महिला न्यायाधीश

  • गौहाटी: 24 न्यायाधीशों में से 1 महिला न्यायाधीश

  • गुजरात: 52 न्यायाधीशों में से 4 महिला न्यायाधीश

  • हिमाचल प्रदेश: 13 न्यायाधीशों में से 1 महिला न्यायाधीश

  • जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय: 17 न्यायाधीशों में से 1 महिला न्यायाधीश

  • झारखंड: 25 न्यायाधीशों में से 1 महिला न्यायाधीश

  • कर्नाटक: 62 न्यायाधीशों में से 5 महिला न्यायाधीश

  • केरल: 47 न्यायाधीशों में से 5 महिला न्यायाधीश

  • मध्य प्रदेश: 53 न्यायाधीशों में से 3 महिला न्यायाधीश

  • मद्रास: 75 न्यायाधीशों में से 9 महिला न्यायाधीश

  • मणिपुर उच्च न्यायालय में 5 न्यायाधीशों की अदालत में कोई महिला न्यायधीश नही है

  • मेघालय उच्च न्यायालय में 4 न्यायाधीशों की अदालत में कोई महिला न्यायाधीश नहीं है

  • उड़ीसा: 27 न्यायाधीशों में से 2 महिला न्यायाधीश

  • पटना उच्च न्यायालय में 53 न्यायाधीशों की अदालत में कोई महिला न्यायाधीश नहीं है

  • पंजाब और हरियाणा: 85 न्यायाधीशों में से 11 महिला न्यायाधीश

  • राजस्थान: 80 न्यायाधीशों में से 1 महिला न्यायाधीश

  • सिक्किम: 3 न्यायाधीश में से 1 महिला न्यायाधीश

  • तेलंगाना: 24 न्यायाधीशों की अदालत में कोई महिला न्यायाधीश नही है

  • त्रिपुरा उच्च न्यायालय: 4 न्यायाधीशों की अदालत में कोई महिला न्यायाधीश नहीं है

  • उत्तराखंड उच्च न्यायालय: 11 न्यायाधीशो के न्यायालय में कोई महिला न्यायाधीश नहीं है।

यह कहा गया था कि अधिकरण में महिला न्यायाधीशों का विवरण केंद्र द्वारा नहीं रखा जाता है क्योंकि वे सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों द्वारा प्रशासित किए जाते हैं।

इसके अलावा, यह कहा गया कि अधीनस्थ न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की जानकारी केंद्रीय रूप से नहीं रखी गई है क्योंकि विषय उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के क्षेत्र में आता है।

नोट: यह रिपोर्ट लोकसभा में कानून मंत्री द्वारा प्रस्तुत जवाब पर आधारित है।

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80 woman judges out of 1,113 in total across High Courts and Supreme Court: Law Minister responds in Lok Sabha on reservation for Women

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