मद्रास हाईकोर्ट के नए नियमों के तहत 281 वकीलों ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए आवेदन किया

यह कवायद मद्रास हाई कोर्ट के 2026 के सीनियर एडवोकेट डेज़िग्नेशन नियमों के तहत पहली बार की जा रही है, जिन्होंने पहले के पॉइंट्स-बेस्ड असेसमेंट सिस्टम की जगह ली है।
Lawyers, Madras High Court
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मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 281 वकीलों ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए आवेदन किया है। यह आवेदन एक काफी बदले हुए डेज़िग्नेशन सिस्टम के तहत किया गया है।

हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर को आवेदकों की लिस्ट जारी की और प्रैक्टिस करने वाले वकीलों, बार काउंसिल और संबंधित बार एसोसिएशन से सुझाव या राय मांगी। राय के साथ वेरिफ़ाई करने लायक जानकारी होनी चाहिए और इसे 27 अक्टूबर को शाम 5.45 बजे तक रजिस्ट्रार (प्रशासन) के पास जमा करना होगा।

इस लिस्ट में 281 आवेदक हैं, जिनके एनरोलमेंट का साल 1970 के दशक से लेकर 2015 तक है।

यह प्रक्रिया हाई कोर्ट द्वारा पिछली बार डेज़िग्नेशन (पदनाम) देने के लगभग चार साल बाद हो रही है। जनवरी 2023 में, हाई कोर्ट की फुल कोर्ट ने उस समय लागू 2020 के नियमों के तहत 62 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के तौर पर डेज़िग्नेट किया था।

हालांकि, अभी की प्रक्रिया 'मद्रास हाई कोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के डेज़िग्नेशन के लिए नियम, 2026' के तहत की जा रही है।

नए नियमों की जानकारी इस साल 23 जुलाई को दी गई थी।

नए नियम मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के बाद बनाए गए थे, जिसमें सीनियर एडवोकेट के डेज़िग्नेशन के लिए पहले से चले आ रहे 100-पॉइंट वाले असेसमेंट सिस्टम को हटा दिया गया था और हाई कोर्ट को अपने मौजूदा नियमों में बदलाव करने या उन्हें बदलने का निर्देश दिया गया था।

नतीजतन, मद्रास हाई कोर्ट के 2026 के नियमों में पहले वाले पॉइंट्स-बेस्ड असेसमेंट और इंटरव्यू सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। अब स्थायी समिति में चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जज शामिल होते हैं, जबकि 2020 की व्यवस्था में एडवोकेट जनरल और बार का एक सदस्य भी समिति का हिस्सा होते थे।

नई व्यवस्था के तहत, आवेदक के पास आम तौर पर कम से कम दस साल का अनुभव होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 45 साल होनी चाहिए, हालांकि फुल कोर्ट उम्र की शर्त में छूट दे सकता है। आवेदकों को मुख्य रूप से हाई कोर्ट या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस करनी चाहिए, जबकि खास ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को हाई कोर्ट में पेश होने की सीमा के संबंध में कुछ छूट दी जा सकती है।

सेक्रेटेरिएट को आवेदक की प्रतिष्ठा, आचरण और ईमानदारी के बारे में जानकारी इकट्ठा करनी होती है और पूरी फ़ाइल फुल कोर्ट के सामने रखनी होती है। फुल कोर्ट उम्मीदवारों की काबिलियत, बार में उनकी स्थिति और कानून में खास जानकारी या अनुभव के आधार पर उनका असेसमेंट करता है। इन नियमों में खास तौर पर वकालत के कौशल, पेशेवर नैतिकता, जूनियर्स को मेंटरिंग (मार्गदर्शन) देना, प्रो-बोनो (मुफ़्त कानूनी सेवा) काम, ईमानदारी और अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता को अहम बातों के तौर पर शामिल किया गया है।

खास बात यह है कि 2026 के नियमों ने 2020 के नियमों को भी रद्द कर दिया और पुरानी व्यवस्था के तहत सभी लंबित आवेदनों, प्रस्तावों और सिफारिशों को वापस करने का निर्देश दिया, ताकि वकील नए सिरे से आवेदन कर सकें।

गाउन के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की सूची यहाँ देखी जा सकती है।

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281 lawyers apply for Senior Advocate designation under Madras High Court's new Rules

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