

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एच सलीम उर्फ वदिवल सलीम और सी प्रदीप की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जिसमें 2017 के एक्ट्रेस अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें दी गई जेल की सज़ा को सस्पेंड करने की मांग की गई थी। [सलीम एच @ वदिवल सलीम बनाम केरल राज्य और इससे जुड़ा मामला]।
सलीम और प्रदीप ने इस मामले में अपनी सज़ा और सज़ा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की है। उन्होंने हाई कोर्ट से यह भी कहा था कि अपील पेंडिंग रहने तक उनकी जेल की सज़ा सस्पेंड कर दी जाए।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि पहली नज़र में यह दिखाने के लिए सबूत मौजूद हैं कि दोनों आरोपियों ने कथित जुर्म करने के लिए क्रिमिनल साज़िश में हिस्सा लिया था।
इसलिए, जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने उनकी जेल की सज़ा सस्पेंड करने की उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने 17 जुलाई के अपने आदेश में कहा, "पहली नज़र में, आरोपी नंबर 1 से 6 के बीच कथित साज़िश को साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर काफी सबूत हैं और उन्होंने उस साज़िश को आगे बढ़ाने के लिए काम किया और अपनी योजना को सटीकता से अंजाम दिया।"
सलीम और प्रदीप उन छह लोगों में शामिल थे जिन्हें एर्नाकुलम ट्रायल कोर्ट ने 2017 में एक मशहूर एक्ट्रेस को चलती गाड़ी में किडनैप करके रेप करने और हमले के विजुअल्स रिकॉर्ड करने का दोषी पाया था।
उन्हें इस जुर्म के लिए 20 साल की कड़ी कैद की सज़ा सुनाई गई।
प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, मुख्य आरोपी, पल्सर सुनी, एक्टर दिलीप के साथ मिलकर एक्ट्रेस को बेइज्जत करने और ब्लैकमेल करने के इरादे से उसे किडनैप करने और सेक्शुअली असॉल्ट करने की क्रिमिनल साज़िश का मुख्य एग्जीक्यूटर था।
दिलीप को ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ साज़िश के आरोपों से बरी कर दिया था। बाकी आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
सुनी और दूसरे सह-दोषियों ने बाद में अपनी सज़ा और सजा को चुनौती देने के लिए अर्जी दी। कोर्ट ने पहले सुनी की अपील पर आखिरी फैसला आने तक उसकी सज़ा सस्पेंड करने की अर्जी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अब सलीम और प्रदीप की ऐसी ही अर्जी खारिज कर दी है।
17 जुलाई के फैसले में, कोर्ट ने इस बात को खारिज कर दिया कि सलीम और प्रदीप सिर्फ़ गाड़ी में पैसेंजर थे और जुर्म में उनका कोई एक्टिव रोल नहीं था। कोर्ट ने माना कि मौजूद चीज़ों से पहली नज़र में पता चलता है कि उन्होंने जुर्म करने में मदद की थी।
कोर्ट ने आगे कहा कि दोनों आरोपी ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई भी साफ़ तौर पर गैर-कानूनी या गलत काम नहीं बता पाए, जिससे उनकी जेल की सज़ा को सस्पेंड करने का कोई औचित्य साबित हो सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वाइवर ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड के दौरान दोनों आरोपियों की पहचान की थी और दूसरे आरोपियों की मदद से मुख्य आरोपी द्वारा किए गए सेक्सुअल असॉल्ट का डिटेल में ब्यौरा दिया था।
दिलीप को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील भी हाई कोर्ट में पेंडिंग है।
सलीम और प्रदीप की तरफ से वकील केवी साबू, एमजी श्रीजीत, अखिल के साबू, निखिल के साबू, अरुणराज एस, लाया थेरेसा एंटनी, हन्ना रहमान, अंजना ए, इंदु मेनन एम और अंजू पीएस ने केस लड़ा। सरकारी वकील सिद्धार्थ ए मेनन और स्पेशल सरकारी वकील वी अजयकुमार ने राज्य की तरफ से केस लड़ा।
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