एडमिशन चरण में मामलों को वर्चुअली सुना जाना चाहिए, हाइब्रिड सिस्टम न्याय तक पहुँच को आसान बनाता है: जस्टिस संजय किशन कौल

जस्टिस एसके कौल, दिनेश माहेश्वरी और हृषिकेश रॉय की पीठ ने हाल ही में दो बार बैक टू बैक टेक्निकल ग्लिच का सामना किया, जिसके कारण वर्चुअल कोर्ट के संक्षिप्त स्थगन का सामना करना पड़ा।
एडमिशन चरण में मामलों को वर्चुअली सुना जाना चाहिए, हाइब्रिड सिस्टम न्याय तक पहुँच को आसान बनाता है: जस्टिस संजय किशन कौल
Justice Sanjay Kishan Kaul

फेसबुक इंडिया हेड बनाम दिल्ली शांति और सद्भाव समिति मामले की सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने आज टिप्पणी की कि हाइब्रिड मोड कुछ मामलों में कैसे फायदेमंद है।

न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि शारीरिक सुनवाई के लिए, सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के लिए वकीलों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, इसीलिये कि केवल उनके मामलों को खारिज कर दिया।

“न्यायमूर्ति कौल ने आज टिप्पणी की, सुनवाई की दोहरी विधि का जीवनकाल लंबा है। यह न्याय तक पहुंच को आसान बनाता है। मैं दक्षिण में था और मैं जानता हूं कि यात्रा पर खर्च करना और दूर के कोर्ट में पेश होना कितना मुश्किल है। एडमिशन चरण में सफलता की दर 20% है तो उस अवस्था में, वर्चुअल मोड के माध्यम उप्युक्त है।“

दिल्ली विधानसभा के लिये उपस्थित डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, भी न्यायमूर्ति कौल से भी सहमत थे।

जस्टिस कौल, दिनेश माहेश्वरी और हृषिकेश रॉय की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए वर्चुअल कोर्ट के संक्षिप्त स्थगन के लिए दो बडी़ बैक टू बैक तकनीकी गड़बड़ियां झेलीं।

आज जस्टिस माहेश्वरी का कनेक्शन भी बाधित हो गया। बेंच को थोड़े ब्रेक के बाद सुनवाई फिर से शुरू करनी पड़ी ताकि जज वर्चुअल कार्यवाही के लिए वापस शामिल हो सकें।

हाल ही में, भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के साथ एक बैठक में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों को सूचित किया गया था कि सुनवाई के हाइब्रिड मोड को सुप्रीम कोर्ट में अपनाया जा रहा है जहाँ मेडिकल विशेषज्ञ की राय के आधार पर नियमित शारीरिक सुनवाई शुरू होने तक भौतिक और आभासी दोनों सुनवाई जारी रहेगी।

इस सप्ताह, सैकड़ों वकील सुप्रीम कोर्ट परिसर में, मुख्य भवन के पास, शारीरिक सुनवाई को फिर से शुरू करने की मांग के लिए एकत्र हुए।

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Cases in the admission stage should be virtually heard, hybrid system eases access to justice: Justice Sanjay Kishan Kaul

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