ब्रेकिंग: बंबई HC ने एनडीपीएस मामले में रिया चक्रवर्ती और 2 अन्य को दी जमानत, अब्दुल परिहार & शौविक चक्रवर्ती की याचिका खारिज

न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल ने एनसीबी द्वारा एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामलों में रिया चक्रवर्ती, दीपेश सावंत औ सैमुअल मिराण्डा को आज जमानत दी।
ब्रेकिंग: बंबई HC ने एनडीपीएस मामले में रिया चक्रवर्ती और 2 अन्य को दी जमानत, अब्दुल परिहार & शौविक चक्रवर्ती की याचिका खारिज
Rhea Chakraborty, Bombay HC

न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल ने बालीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, दीपेश सावंत और सैमुअल मिराण्डा को उनके खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामलों में जमानत दे दी।

हालांकि, न्यायालय ने अब्दुल परिहार और शौविक चक्रवर्ती की जमानत अर्जी अस्वीकार कर दीं। ये दोनों भी एनसीबी द्वारा एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामलों में आरोपी है।

रिया चक्रवर्ती को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुये न्यायालय ने कहा कि उन्हें अन्य शर्तो के साथ ही एक लाख रूपए का निजी मुचलका भी देना होगा।

न्यायालय द्वारा लगाई गयी शतो के अनुसार रिया चक्रवर्ती को जमानत पर रिहा होने के बाद 10 दिन तक रोजाना नजदीक के थाने में हाजिरी देनी होगी। रिया के देश छोड़कर जाने पर प्रतिबंध रहेगा।

दीपेश सावंत और सैमुअल मिराण्डा को जमानत के लिये 50-50 हजार रूपए के निजी मुचलका देना होगा और दोनों को अपने पासपोर्ट जब्त करने का भी आदेश दिया गया है।

एनसीबी की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल अनिल सिह ने न्यायालय से अनुरोध किया कि इस आदेश के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस अनुरोध को न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।

रिया चक्रवर्ती की ओर से अधिवक्ता सतीश मानशिंदे ने जमानत के लिये एक लाख रूपए का मुचलका देने के लिये एक महीने का समय देने का अनुरोध किया जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

रिया चक्रवर्ती, शौविक चक्रवर्ती, अब्दुल बासित परिहार, सैमुअल मिराण्डा और दीपेश सावंत ने मुंबई में एनडीपीएस की विशेष अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किये थे।

न्यायमूर्ति कोतवाल ने इन पांच जमानत आवेदनों पर 29 सितंबर को न्यायालय के कामकाज के सामान्य समय से भी देर तक सुनवाई करने के बाद कहा था कि इन पर आदेश बाद में सुनाया जायेगा।

रिया चक्रवर्ती और अन्य पर आरोपी है कि उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिये ड्रग्स प्राप्त करने में सहयोग किया।

इस मामले में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सतीश मानशिन्दे, तारीक सैयद, सुबोध देसाई ओर राजेन्द्र राठौड़ ने बहस की और उन्होंने दलील दी कि निम्न कारणों से उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

  1. नार्कोटिक्स क्राइम ब्यूरो को इस मामले में जांच का कोई अधिकार नहीं था क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने 19 अगस्त, 2020 के आदेश में कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से संबंधित सारी जांच सीबीआई को सौंप जायें।

  2. यदि एनसीबी का अधिकार क्षेत्र था तो भी आरोपियों पर जमानती किस्म के अपराध के आरोप थे। इस संबंध में वकील ने कहा कि इन मामलों में शामिल कथित मादक पदार्थ की मात्रा थोड़ी थी और यह व्यावसायिक मकसद के लिये नहीं थी।

  3. आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस कानून की धारा 27ए के तहत आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं थे।

एनसीबी की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि नार्कोटिक्स क्राइम ब्यूरो को इस मामले में जांच करने का अधिकार था। उन्होंने कहा कि एनसीबी के पास यह साबित करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य हैं कि आरोपी एक बड़े ड्रग गिरोह का हिस्सा हैं।

एनसीबी ने रिया और अन्य को एनडीपीएस कानून के प्रावधानों के तहत कथित अपराध करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, एस्प्लेनेड कोर्ट ने अभियोजन की रिमाण्ड की अर्जी पर आरोपियों को 14 दिन की हिरासत में दे दिया था।

एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत ने 11 सितंबर को उनकी जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी।

विशेष एनडीपीएस अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद रिया चक्रवर्ती और अन्य आरोपियों ने बंबई उच्च न्यायालय में जमानत की अर्जियां दायर की थीं। इन अजितयों मे जमानत के लिये 51 कारण गिनाये गये थे।

न्यायमूर्ति कोतवाल ने इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिये 29 सितंबर को सूचीबद्ध करने से पहले इसकी प्रारंभिक सुनवाई की थी।

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