[ब्रेकिंग] बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव में आरोपी डॉक्टर वरवारा राव को 6 महीनो के लिए जमानत दी

जस्टिस एसएस शिंदे और मनीष पिटले की खंडपीठ ने कहा, "हमें लगता है कि अंडर ट्रायल की शर्त के साथ उसे वापस जेल भेजना अनुचित होगा।"
[ब्रेकिंग] बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव में आरोपी डॉक्टर वरवारा राव को 6 महीनो के लिए जमानत दी
Varavara Rao, Bombay High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को भीमा कोरेगांव के 82 वर्षीय आरोपी डॉ. वरवारा राव को चिकित्सा आधार पर जमानत दे दी।

न्यायालय ने छह महीने की अवधि के लिए अस्सी वर्षीय को जमानत दी ।

यह आदेश दो अलग-अलग दलीलों में जस्टिस एसएस शिंदे और मनीष पिटले की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया था – पहली याचिका मे राव ने जमानत की प्रार्थना की और दूसरी मे उनकी पत्नी पेंड्याला हेमलता द्वारा स्वास्थ्य के उनके मौलिक अधिकार के कथित उल्लंघन के मद्देनजर अदालत के हस्तक्षेप की मांग की।

कोर्ट ने 1 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आज अपना फैसला सुनाते हुए, खंडपीठ ने कहा,

"हमें लगता है कि अंडर ट्रायल की शर्त के साथ, उसे वापस (जेल भेजना) अनुचित होगा। ”

राव को इस शर्त पर जमानत दी गई है कि उन्हें विशेष एनआईए कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहना होगा। उन्हें किसी भी गतिविधि या इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त नहीं होने के लिए भी निर्देशित किया गया था जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

राव की पत्नी ने शुरू में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था जिसने राहत से इनकार कर दिया और इसके बजाय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने वकीलों से राव की बिगड़ती उम्र और बढ़ी उम्र को देखते हुए बहस करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति शिंदे ने दोनों वकील को बताया था, “आप डॉ. राव की आयु और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना सुनिश्चित करें। उनकी उम्र 80 वर्ष से ऊपर है। सुनिश्चित करें कि आपकी प्रस्तुतियाँ इसे ध्यान में रखकर हों “

वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और इंदिरा जयसिंह राव के लिए उपस्थित हुए थे।

उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अगर राव को तलोजा केंद्रीय कारागार में वापस भेज दिया जाता है, तो राव की चिकित्सा स्थिति खराब हो सकती है, और ऐसा करने का निर्णय उनके स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार के खिलाफ होगा।

जयसिंह ने प्रस्तुत किया कि राव की हिरासत की स्थिति क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक थी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के लिए उपस्थित हुए जिन्होंने दो मुख्य तथ्य प्रस्तुत किये:

  1. जेल प्रशासन उन सभी चिकित्सा सुविधाओं को प्रदान करने में सक्षम है जो नानावती अस्पताल द्वारा प्रदान की जा रही थीं।

  2. जमानत याचिका पर विचार करते समय, आरोपी के खिलाफ लगाए गए अपराध पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए

सिंह ने आगे कहा कि उन्होंने याचिका का विरोध नहीं किया है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं था।

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[BREAKING] Bombay High Court grants bail to Bhima Koregaon accused Dr. Varavara Rao for six months

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