

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के पास अपनी शिकायत लेकर जाए कि कर्नाटक राज्य को कावेरी जल का उसका उचित हिस्सा नहीं दे रहा है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कर्नाटक को पानी का अपना बकाया हिस्सा तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
तमिलनाडु की ओर से पेश वकील ने कहा,
"हमें पानी की आनुपातिक मात्रा मिलनी चाहिए, जो दुर्भाग्य से नहीं मिल रही है।"
कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी देखा था कि तमिलनाडु को कर्नाटक से उसके तय हिस्से से ज़्यादा पानी मिला है।
आज कोर्ट ने बताया कि राज्य को CWMA के निर्देशों के अनुसार पहले ही पानी मिल चुका है।
कोर्ट ने कहा, "आपको CWMA के निर्देशानुसार पानी मिल चुका है।"
हालांकि, तमिलनाडु के वकील ने तर्क दिया कि CWMA ने पानी की उस आनुपातिक मात्रा को छोड़ने का निर्देश नहीं दिया था जो राज्य को मिलनी चाहिए थी।
इसके बाद कोर्ट ने तमिलनाडु से इस मुद्दे पर CWMA से संपर्क करने को कहा।
इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
कावेरी जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद की जड़ें 1892 और 1924 में तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर रियासत के बीच हुए दो समझौतों में हैं।
कई दौर की असफल बातचीत के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) के गठन का निर्देश दिया। ट्रिब्यूनल ने 2007 में अपना फैसला सुनाया, जिसमें तमिलनाडु को हर दिन एक निश्चित मात्रा में पानी लेने की अनुमति दी गई।
हालांकि, दोनों राज्यों द्वारा फैसले की समीक्षा के लिए याचिकाएं दायर करने के बाद भी विवाद जारी रहा।
2016 में, तमिलनाडु ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया क्योंकि कर्नाटक ने कहा था कि उसके जलाशय में साझा करने के लिए और पानी नहीं है। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कावेरी प्रबंधन बोर्ड (CMB) का गठन करने को कहा।
2023 में, कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की उस अर्जी पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें कावेरी नदी के पानी में राज्य के मौजूदा हिस्से को 5,000 से बढ़ाकर 7,200 क्यूसेक (क्यूबिक फीट प्रति सेकंड) प्रतिदिन करने की मांग की गई थी।
इन दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक और विवाद शीर्ष अदालत में लंबित है। यह मामला पेन्नैयार नदी से जुड़ा है। तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ एक मूल वाद (original suit) दायर किया है।
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Cauvery water row: Supreme Court asks Tamil Nadu to approach CWMA over proportionate share