केंद्र ने झारखंड के DGP की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

केंद्र ने आरोप लगाया कि झारखंड ने सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी लिए बिना ही 2025 के DGP चयन नियम लागू कर दिए और बाद मे ऐसे अधिकारियो को नियुक्त किया जो बची हुई सेवा अवधि की ज़रूरी शर्तो को पूरा नही करते थे
Police Officer with Supreme Court
Police Officer with Supreme Court
Published on: 
3 min read

केंद्र सरकार ने बुधवार को झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने यह मामला उठाया।

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana
Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

केंद्र सरकार ने अपनी अर्ज़ी में आरोप लगाया है कि झारखंड ने DGP के चयन के लिए 2025 का नियम बनाते समय 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की "पूरी तरह से अनदेखी" की है।

केंद्र ने झारखंड को DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, केंद्र ने यह घोषित करने की भी मांग की है कि राज्य के 2025 के DGP चयन नियम के तहत की गई नियुक्तियां गैर-कानूनी हैं।

यह अर्ज़ी "झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति नियम, 2025" से संबंधित है, जिसे राज्य ने 8 जनवरी, 2025 को अधिसूचित किया था।

केंद्र का आरोप है कि यह नियम 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों - खासकर 22 सितंबर 2006, 3 जुलाई 2018, 16 जनवरी 2019 और 13 मार्च 2019 को दिए गए आदेशों - का उल्लंघन करके बनाया गया था।

याचिका के अनुसार, झारखंड ने नियम को अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति नहीं ली थी, जबकि कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उसके निर्देशों के विपरीत कोई भी राज्य या केंद्रीय कानून या नियम लागू नहीं होगा और अगर राज्य उनमें कोई बदलाव चाहते हैं तो वे कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

3 जुलाई 2018 के निर्देशों के तहत, राज्यों को मौजूदा DGP के रिटायरमेंट से कम से कम तीन महीने पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव भेजने थे। UPSC को एक पैनल तैयार करना था और राज्य को उस पैनल में से DGP की नियुक्ति करनी थी।

केंद्र ने 2 फरवरी, 2025 को दो साल के कार्यकाल के लिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अनुराग गुप्ता की DGP के तौर पर नियुक्ति को भी चुनौती दी है।

केंद्र की अर्ज़ी के अनुसार, नियुक्ति के समय गुप्ता की सेवा में केवल तीन महीने ही बचे थे। उनकी रिटायरमेंट की तारीख 30 अप्रैल, 2025 थी।

गृह मंत्रालय (MHA), जो IPS अधिकारियों के लिए कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटी है, ने बाद में 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई, 2025 के पत्रों के ज़रिए गुप्ता की नियुक्ति का विरोध किया। राज्य को यह भी बताया गया कि गुप्ता 30 अप्रैल को रिटायर हो चुके थे, जैसा कि अर्ज़ी में कहा गया है।

बाद में गुप्ता ने वॉलंटरी रिटायरमेंट (स्वेच्छा से रिटायरमेंट) की मांग की, जिसे झारखंड सरकार ने 6 नवंबर, 2025 को मंज़ूरी दे दी।

याचिका में 30 दिसंबर, 2025 को IPS अधिकारी तदाशा मिश्रा की DGP के तौर पर नियुक्ति को भी चुनौती दी गई है।

राज्य ने छह महीने की बची हुई सर्विस की ज़रूरत को हटाने के लिए 29 दिसंबर, 2025 के एक प्रस्ताव के ज़रिए 2025 के नियम में संशोधन किया था। मिश्रा, जिन्हें अगले दिन DGP नियुक्त किया गया था, 31 दिसंबर, 2025 को रिटायर होने वाली थीं।

खास बात यह है कि यह नियुक्ति पहले ही सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में आ चुकी थी।

एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने हाल ही में कोर्ट को बताया कि रिटायरमेंट से एक दिन पहले मिश्रा की नियुक्ति प्रकाश सिंह के फैसलों में तय सिद्धांतों के खिलाफ थी।

MHA ने 6 जनवरी, 2026 के एक पत्र में झारखंड को 2025 के नियम और मिश्रा की नियुक्ति को रद्द करने का निर्देश दिया। केंद्र की अर्ज़ी में कहा गया है कि उसने राज्य से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि झारखंड ने अपने DGP को दो साल का कार्यकाल देने के लिए प्रकाश सिंह के फैसले का "चुनिंदा" तौर पर इस्तेमाल किया, जबकि कोर्ट द्वारा अनिवार्य चयन प्रक्रिया से हटकर काम किया।

अर्ज़ी में कहा गया है, "यह कानून का बुनियादी तौर पर गलत इस्तेमाल है।"

इसमें तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए था, न कि चुनिंदा तौर पर।

कोर्ट ने 19 मई, 2026 को ध्यान दिया था कि झारखंड में एक एक्टिंग DGP काम कर रहा था और राज्य से अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) मांगा था।

इसने पहले झारखंड को यह बताने का निर्देश भी दिया था कि उसके पिछले आदेश के अनुसार DGP की नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को क्यों नहीं भेजा गया।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Centre moves Supreme Court against Jharkhand DGP appointment

Hindi Bar & Bench
hindi.barandbench.com