

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को क्षत्रिय करणी सेना की उस याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने से इनकार कर दिया, जिसमें 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर आरक्षण और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स में इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए रेगुलेशंस, 2026) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त न देने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती दी गई थी।
चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने क्षत्रिय करणी सेना से याचिका दायर करने को कहा, जिसके बाद इसे कल लिस्ट किया जाएगा।
यह मामला आरक्षण नीतियों और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम), 2026 के खिलाफ़ क्षत्रिय करणी सेना के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।
इस संगठन ने शुरू में 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 28 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की तैयारियों का हवाला देते हुए इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।
इसके बाद क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने इस इनकार को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। जब 3 सितंबर को जस्टिस अमित महाजन के समक्ष यह मामला आया, तो कोर्ट ने याचिकाकर्ता से प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की तारीख बदलने पर विचार करने को कहा।
इसके बाद संगठन ने 20 सितंबर को प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
7 सितंबर को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली पुलिस को 20 सितंबर के विरोध प्रदर्शन के लिए नए आवेदन पर विचार करने और 14 सितंबर तक अपना निर्णय बताने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस प्रदर्शन पर उचित शर्तें लगा सकती है।
मौजूदा याचिका में 20 सितंबर के प्रदर्शन के लिए बाद में अनुमति न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
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