

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आज भारत में सचमुच जज ही जजों को चुनते हैं। कोर्ट भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में केंद्र सरकार की अहम भूमिका पर विचार कर रहा था।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
बेंच ने कहा, "जैसा कि आपने कहा कि जज ही जजों को चुनते हैं, तो हमें हैरानी होती है कि क्या आजकल सच में जज ही जजों को चुनते हैं।"
यह टिप्पणी तब की गई जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एग्जीक्यूटिव (कार्यपालिका) और लेजिस्लेचर (विधायिका) ही सरकार के वे अंग हैं जो सीधे तौर पर जनता के प्रति जवाबदेह हैं।
हालांकि, कोर्ट ने पूरे भारत में कानून बनाने वालों और मंत्रियों के आपराधिक बैकग्राउंड का ज़िक्र किया।
"डॉ. अंबेडकर ने अपनी मौत से एक साल पहले कहा था कि भारत में लोकतंत्र विफल हो गया है। इसका एक वीडियो भी मौजूद है। यहां तक कि जब 1950 में संविधान लागू किया गया था, तब भी उन्होंने कहा था कि यह पक्षपाती है... डॉ. अंबेडकर का निधन 1955-56 में हुआ था। उन्हें अफ़सोस था। उन्होंने अपनी कही बातों से अलग राय ज़ाहिर की थी। उन्होंने लोगों से जैसी उम्मीद की थी, वैसा नहीं हुआ। बस हमें ये आंकड़े दीजिए कि कितने राज्यों में ऐसे मंत्री हैं जिन पर केस चल रहे हैं?"
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Do judges really select judges nowadays? Supreme Court asks Centre in ECI appointments case