मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक की एक वोट से जीत के खिलाफ DMK नेता की चुनाव याचिका खारिज कर दी

चुनाव याचिका एक विवादित पोस्टल बैलेट पर केंद्रित थी, जिसके बारे में DMK नेता का दावा था कि वह एक वोट के अंतर वाले मुकाबले का नतीजा बदल सकता था।
KR Periakaruppan
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मद्रास उच्च न्यायालय ने परिणाम को चुनौती देने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता केआर पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज करते हुए तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र से तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) विधायक आर सीनिवास सेतुपति की एक वोट से जीत को बरकरार रखा है।

जस्टिस जीके इलानथिरायन ने सेतुपति की उस अर्ज़ी को मंज़ूरी दे दी, जिसमें पेरियाकरुप्पन की चुनावी याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज करने की मांग की गई थी।

Justice GK Ilanthiraiyan
Justice GK Ilanthiraiyan

सेथुपति ने 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर' के ऑर्डर VII नियम 11(a) के तहत याचिका को खारिज करने की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि याचिका में कार्रवाई का कोई ठोस आधार (cause of action) नहीं बताया गया था और इसमें 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत ज़रूरी अहम तथ्य शामिल नहीं थे। कोर्ट ने इस अर्ज़ी पर अपना आदेश 17 सितंबर को सुरक्षित रख लिया था।

सेथुपति ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पेरियाकरुप्पन को सिर्फ़ एक वोट के अंतर से हराया था। इसके बाद पेरियाकरुप्पन ने चुनाव नतीजों को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की थी।

पेरियाकरुप्पन की चुनौती का मुख्य मुद्दा एक पोस्टल बैलेट था, जो कथित तौर पर शिवगंगा ज़िले के तिरुपत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के लिए था, लेकिन गलती से उसी नाम वाले दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भेज दिया गया था। पेरियाकरुप्पन का दावा था कि बैलेट को सही निर्वाचन क्षेत्र में भेजने के बजाय, उसे पाने वाले रिटर्निंग ऑफिसर ने उसे खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि बैलेट उनके पक्ष में डाला गया था और इसलिए, एक वोट से तय हुए चुनाव के नतीजे को बदल सकता था।

DMK नेता ने पोस्टल बैलेट की गिनती और दोबारा जांच को लेकर भी आरोप लगाए थे। उनके मामले के अनुसार, 2,276 पोस्टल बैलेट डाले गए थे, लेकिन सिर्फ़ 2,275 की गिनती हुई; इनमें से 306 खारिज कर दिए गए और 1,969 को वैध माना गया।

उन्होंने राउंड-वार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के आंकड़ों और 'फॉर्म 20' व चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दिख रहे आंकड़ों के बीच 18 वोटों के अंतर का भी आरोप लगाया। पेरियाकरुप्पन का कहना था कि इन मुद्दों से तथ्य संबंधी विवादित सवाल उठते हैं, जिनके लिए सुनवाई (ट्रायल) की ज़रूरत है और चुनाव याचिका को खारिज करने की अर्ज़ी पर विचार करने के चरण में इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

हालांकि, सेथुपति ने तर्क दिया कि अगर चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तो भी उनमें ऐसे अहम तथ्य नहीं थे जिनसे यह साबित हो सके कि कथित अनियमितताओं ने चुनाव के नतीजे पर कोई बड़ा असर डाला था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पोस्टल बैलेट, वोटों की गिनती में गड़बड़ी और दोबारा जांच से जुड़े आरोपों से 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट' के तहत कानूनी कार्रवाई का कोई ठोस आधार नहीं बनता है।

यह चुनावी याचिका, चुनाव के तुरंत बाद पेरियाकरुप्पन द्वारा दायर की गई रिट याचिका से शुरू हुई कानूनी लड़ाई के बाद आई थी। उस मामले में, मद्रास हाई कोर्ट ने 12 मई को सेतुपति को सदन में संख्या बल से जुड़ी किसी भी फ्लोर टेस्ट या विधायी कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया था।

अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब चुनावी विवाद के लिए कानूनी उपाय के तौर पर चुनावी याचिका का प्रावधान है, तो हाई कोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका पर सुनवाई क्यों की।

बाद में, मौजूदा चुनावी याचिका दायर करने के बाद पेरियाकरुप्पन ने अपनी रिट याचिका वापस ले ली।

सेतुपति की ओर से सीनियर एडवोकेट राघवाचारी पेश हुए, जिनके साथ 'गोहिल अग्रवाल लॉ चैंबर्स' के एडवोकेट दीक्षिता गोहिल, प्रांजल अग्रवाल, यश एस विजय और टी महेंद्रन भी शामिल थे।

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Madras High Court rejects DMK leader's election petition against TVK MLA's one-vote victory

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