परीक्षा सुधार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह NTA ऑफिस का निरीक्षण करेगा; नंदन नीलेकणि पैनल से प्रगति पर रिपोर्ट मांगी

जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा, "हम आकर देखेंगे कि क्या सिस्टम असल में लागू है, क्या यह काम कर रहा है या नहीं, और मैनपावर वगैरह - इन सभी चीज़ों की जांच करेंगे।"
Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली टास्क फोर्स से प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी। इस टास्क फोर्स का गठन भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए सुझाव देने के मकसद से किया गया था।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने आदेश दिया कि इस मामले में दो हफ़्ते के अंदर एक हलफ़नामा (affidavit) दाखिल किया जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया, "हम हाई-पावर्ड कमेटी के साथ तालमेल बिठा रहे DoPT के जॉइंट सेक्रेटरी को निर्देश देते हैं कि वे कमेटी की प्रगति के बारे में बताते हुए एक हलफ़नामा दाखिल करें। यह हलफ़नामा आज से दो हफ़्ते के अंदर दाखिल किया जाए। मामले को तीन हफ़्ते बाद लिस्ट किया जाए।"

खास बात यह है कि कोर्ट ने यह भी कहा कि जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के हेडक्वार्टर जाकर वहां के सिस्टम की जांच करना चाहेंगे।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, "मैं और मेरे साथी जज, एक दिन वहां आएंगे।"

कोर्ट को बताया गया कि NTA के पास अब मिंटो रोड के पास एक अलग स्थायी जगह है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि वे खुद वहां जाकर देखेंगे कि सिस्टम को ठीक से चलाने के लिए ज़रूरी मैनपावर मौजूद है या नहीं।

जज ने कहा, "हम आकर देखेंगे कि सिस्टम असल में मौजूद है या नहीं, वह काम कर रहा है या नहीं, मैनपावर और बाकी सभी चीज़ें कैसी हैं।"

Justice PS Narasimha and Justice Alok Aradhe
Justice PS Narasimha and Justice Alok Aradhe

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि NTA के कम से कम आधे कर्मचारी पक्के (परमानेंट) होने चाहिए और सभी कर्मचारी दूसरे विभागों से डेपुटेशन पर नहीं होने चाहिए।

कोर्ट ने कहा, "वहां पक्के कर्मचारी होने चाहिए। साथ ही, दूसरे काम करने वाले संस्थानों के साथ आपके संबंध, आप उनके साथ कैसे मिलकर काम कर रहे हैं, कितना डेटा है... क्या हमें कानूनी आधार की ज़रूरत है?"

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि नंदन नीलेकणि कमेटी ने बहुत विस्तार से बातचीत की है और हो सकता है कि वे सितंबर के आखिर तक अपनी रिपोर्ट सौंप दें।

कोर्ट ने कहा कि उनकी सिफारिशें सिर्फ़ कागज़ तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ज़मीन पर भी कुछ असरदार बदलाव होने चाहिए।

बेंच ने कहा, "प्रगति एक बात है। क्या सुझाव दिए गए हैं? सबसे ज़रूरी बात है उन्हें संस्थागत रूप देना। देखिए, आप जानते हैं कि हमें किस बात की थोड़ी चिंता है। हमारे पास राधाकृष्णन कमेटी थी। तो आज हमारे पास सिर्फ़ एक कमेटी की रिपोर्ट है। है ना? बस यहीं बात खत्म हो जाती है। इसे आगे बढ़ना चाहिए। सिफारिशों पर विचार करना और उन्हें लागू करना सबसे ज़रूरी हिस्सा है।"

मेहता ने कहा कि सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है और सिफारिशों को लागू करेगी।

Solicitor General Tushar Mehta
Solicitor General Tushar Mehta

कोर्ट ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह पर विचार करने पर ज़ोर दिया।

बेंच ने कहा, "हम वैसे भी इस मामले पर नज़र रखेंगे। हम देखेंगे कि क्या सुझाव आते हैं। जब जॉइंट सेक्रेटरी के ज़रिए हाई-पावर कमेटी का हलफ़नामा रिकॉर्ड पर आ जाएगा, तो हमें पता चलेगा कि काम कैसे आगे बढ़ रहा है। हम उसी के अनुसार इस पर कार्रवाई करेंगे।"

कोर्ट इस साल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) से जुड़े प्रश्न-पत्र लीक होने के मामलों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

कोर्ट के सामने दायर याचिकाओं में 'फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन' (FAIMA) की याचिका भी शामिल है, जिसे वकील तन्वी दुबे ने दायर किया है। इसमें NTA को बदलने या उसका पुनर्गठन करने की मांग की गई है।

अन्य मांगों के अलावा, याचिका में प्रश्न-पत्रों की "डिजिटल लॉकिंग", कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल अपनाने और गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए सेंटर-वाइज़ नतीजे जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने CBT में बदलाव कैसे किया जा सकता है, इस पर सुझाव देते हुए एक अर्ज़ी भी दायर की है।

एक और याचिका 'यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट' ने वकील रितु रेनीवाल और चारू माथुर के ज़रिए दायर की है। इसमें बेहतर निगरानी और सीधे संसदीय जवाबदेही वाली एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने भी एक अलग याचिका दायर की है।

इस याचिका में NEET-UG को CBT फ़ॉर्मेट में बदलने और NTA की जगह एक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाने जैसी मांगें की गई हैं।

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Exam reforms: Supreme Court says will inspect NTA office; seeks report on progress by Nandan Nilekani panel

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