सरकारी कंपनी IIFCL ने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली मुंबई मेट्रो के खिलाफ़ ₹1745 करोड़ के बकाये को लेकर NCLT मे मामला दर्ज कराया

NCLT ने IIFCL UK से अपनी इनसॉल्वेंसी याचिका में कमियों को दूर करने के लिए कहा है, जिसमें लिमिटेशन, सेक्शन 10A के तहत बकाया और क्लेम का रुपये में कन्वर्ज़न शामिल है।
Mumbai Metro Rail Project
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भारत सरकार की कंपनी IIFCL की विदेशी शाखा, इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (UK) लिमिटेड (IIFCL UK) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) के खिलाफ़ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। यह मांग लगभग ₹1,745 करोड़ के कथित बकाया को लेकर की गई है।

MMOPL को अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर कंट्रोल करती है।

IIFCL UK ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 7 के तहत एक एप्लीकेशन दायर की है, जिसमें एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) सुविधा के रीपेमेंट में डिफॉल्ट का आरोप लगाया गया है।

जुडिशियल मेंबर नीलेश शर्मा और टेक्निकल मेंबर समीर काकर की बेंच ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की।

IIFCL के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि कुल बकाया रकम लगभग US$182 मिलियन या करीब ₹1,745 करोड़ थी।

जब बेंच ने बाद में क्लेम का ब्योरा मांगा, तो वकील ने कहा कि ब्याज के अलावा क्लेम की गई मूल रकम (प्रिंसिपल अमाउंट) लगभग US$56.35 मिलियन थी।

डिफॉल्ट की तारीख 1 अप्रैल, 2018 बताई गई।

IIFCL ने कहा कि MMOPL की बैलेंस शीट में कर्ज और डिफॉल्ट की तारीख को स्वीकार किया गया है। इसने डिफॉल्ट को दर्ज करने वाला NeSL फॉर्म C भी रिकॉर्ड पर रखा।

हालांकि, NCLT को इनसॉल्वेंसी एप्लीकेशन में कई कमियां मिलीं और उसने IIFCL UK को उन्हें ठीक करने के लिए सात दिन का समय दिया।

बेंच द्वारा उठाए गए मुद्दों में से एक लिमिटेशन (समय-सीमा) का मुद्दा था।

चूंकि डिफॉल्ट अप्रैल 2018 का है, इसलिए बेंच ने IIFCL से यह दिखाने को कहा कि उसकी इनसॉल्वेंसी एप्लीकेशन लिमिटेशन पीरियड के दायरे में कैसे आती है।

IIFCL ने MMOPL की बैलेंस शीट में बाद में की गई स्वीकारोक्ति और वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) प्रस्तावों का हवाला दिया।

वकील ने 6 सितंबर, 2022 के OTS प्रस्ताव का जिक्र किया और कहा कि MMOPL ने अपनी बैलेंस शीट में हर साल इस देनदारी को स्वीकार किया है।

बेंच ने IIFCL से एक टेबल रिकॉर्ड पर रखने को कहा जिसमें यह दिखाया गया हो कि एक स्वीकारोक्ति से दूसरी स्वीकारोक्ति तक लिमिटेशन पीरियड कैसे बढ़ाया गया।

ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि IIFCL द्वारा क्लेम की गई रकम में मूलधन और ब्याज शामिल था, जो IBC की धारा 10A के दायरे में आने वाली अवधि के दौरान देय हुआ था।

धारा 10A कानून द्वारा सुरक्षित COVID-19 अवधि के दौरान होने वाले डिफॉल्ट के लिए इनसॉल्वेंसी कार्यवाही शुरू करने पर रोक लगाती है। MMOPL को दी गई ECB सुविधा को 60 असमान तिमाही किश्तों में चुकाया जाना था।

जब बेंच ने पूछा कि क्या सेक्शन 10A की अवधि के दौरान देय राशि को दिवालियापन के दावे से बाहर रखा गया था, तो IIFCL के वकील ने माना कि उन्हें अलग नहीं किया गया था।

बेंच ने कहा, "10A अवधि के भीतर देय राशि का दावा दिवालियापन की अर्जी में कभी नहीं किया जा सकता है।"

ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर प्रतिबंधित अवधि की बकाया राशि दावे का हिस्सा बनी रहती है, तो अर्जी को उसके मौजूदा रूप में खारिज किया जा सकता है।

एक और कमी उस करेंसी से जुड़ी थी जिसमें दावा बताया गया था।

बेंच ने गौर किया कि हालांकि अर्जी में कर्ज को अमेरिकी डॉलर में बताया गया था, लेकिन फॉर्म 1 में बकाया राशि को भारतीय रुपये में भी बताना ज़रूरी है।

वकील ने माना कि अर्जी में रुपये की राशि नहीं बताई गई थी और वे संशोधित फॉर्म 1 दाखिल करने पर सहमत हुए।

ट्रिब्यूनल ने यह भी गौर किया कि अर्जी के साथ NeSL फॉर्म C तो संलग्न था, लेकिन NeSL फॉर्म D नहीं था।

इसके अनुसार, बेंच ने IBC के सेक्शन 7(5) के पहले प्रावधान के तहत IIFCL UK को नोटिस जारी किया और सात दिनों के भीतर कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। IIFCL को संशोधित फॉर्म 1 के साथ एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई।

मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और IDBI बैंक सहित कर्जदाताओं द्वारा MMOPL के खिलाफ शुरू की गई पिछली दिवालियापन कार्यवाही का भी ज़िक्र किया।

IIFCL ने कहा कि कर्जदाताओं द्वारा अपना कर्ज नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) को सौंपने के बाद वे कार्यवाही वापस ले ली गई थीं।

IIFCL UK ने कहा कि उसका ECB एक्सपोज़र अलग था।

उसने यह भी कहा कि हालांकि उसने संयुक्त कर्जदाता फोरम से जुड़े पुनर्गठन के पिछले प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी थी, लेकिन उसके बोर्ड ने पुनर्गठन को कभी अंतिम मंज़ूरी नहीं दी थी।

वकील ने NCLT को यह भी बताया कि दिसंबर 2022 में बकाया राशि का लगभग 10 प्रतिशत प्राप्त हुआ था, लेकिन उसके बाद कोई और भुगतान नहीं किया गया।

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Government-owned IIFCL moves NCLT against Anil Ambani-led Mumbai Metro over ₹1,745 crore dues

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