

गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया द्वारा एक न्यायिक अधिकारी के बारे में हलफनामे में दिए गए बयानों पर कड़ी नाराजगी जताई है।
अदालत ने उनकी बार-बार मांगी गई माफी को खारिज कर दिया और चेतावनी दी कि उन्होंने "सीमा पार कर ली है"।
जस्टिस निराल आर. मेहता ने कहा कि कलेक्टर का आचरण अस्वीकार्य है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने धमेलिया से कहा, "क्या आप अदालत के निर्देशों के अनुसार अपना कर्तव्य निभा रहे हैं? क्या आप किसी कानून का पालन नहीं करते? अपने AC ऑफिस में बैठकर आप एक न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगा रहे हैं? आपकी हिम्मत कैसे हुई?"
अदालत धमेलिया द्वारा दायर एक हलफनामे की जांच कर रही थी। यह हलफनामा एक ऐसी अर्जी के खारिज होने से जुड़े सवाल के जवाब में दिया गया था, जिसमें कुछ जमीन के 'गैर-कृषि' (NA) उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। कलेक्टर ने 17 अगस्त 2026 को इस अर्जी को मुख्य रूप से इस आधार पर खारिज कर दिया था कि गुजरात राजस्व न्यायाधिकरण (GRT) के समक्ष कुछ पुनरीक्षण (revision) अर्जियां लंबित थीं। हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा था कि वे कार्यवाही 2024 में ही पूरी हो चुकी थीं।
इसके अलावा, कलेक्टर ने हलफनामे में कहा,
“चूंकि उक्त प्रभारी अध्यक्ष ने आनंद जिले की किसी अन्य जमीन के मामले में, गुजरात उच्च न्यायालय के आदेशों को ठीक से समझे और उनकी व्याख्या किए बिना ही आदेश पारित कर दिया था...”
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कलेक्टर यह बता सकते थे कि पुनरीक्षण अर्जियों के निपटारे की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई है। इसके बजाय, उन्होंने GRT के तत्कालीन प्रभारी अध्यक्ष से जुड़ी अन्य बातें भी लिख दीं।
जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की, “वडोदरा के कलेक्टर संक्षेप में यह कह सकते थे कि उक्त पुनरीक्षण अर्जियों के निपटारे की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर नहीं दिख रही है। लेकिन उन्होंने पूरा इतिहास बताना चुना, जो प्रथम दृष्टया एक न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाने जैसा है। शपथ के तहत ऐसी बातें कहना न केवल अनुचित है, बल्कि आपत्तिजनक और निंदनीय भी है।”
जज ने बार-बार धमेलिया से पूछा कि उन्होंने ये बातें क्यों शामिल कीं, और उनकी बिना शर्त माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कलेक्टर ने हलफनामा वापस लेने की पेशकश भी की, लेकिन अदालत ने इसकी अनुमति नहीं दी।
जस्टिस मेहता ने कहा, “ऐसे दर्जनों आदेश हैं। मैं अब तक आपको नजरअंदाज करता रहा, लेकिन अब आपने सारी हदें पार कर दी हैं।”
इसके अलावा, अदालत ने धमेलिया के खिलाफ एक अलग मामले में चल रही अवमानना (contempt) कार्यवाही का भी संज्ञान लिया, जिसमें अप्रैल 2026 में एक डिवीजन बेंच ने आरोप तय किए थे। जस्टिस मेहता ने चिंता जताई कि ऐसी कार्यवाही के बावजूद इस तरह के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी सरकारी अधिकारी की माफी को तब सच्चा माना जा सकता है, जब उसका ऐसा आचरण बार-बार दोहराया जा रहा हो।
जब धमेलिया ने फिर से माफी मांगी, तो जज ने कहा कि वह ऐसी माफी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग सकते हैं।
जस्टिस मेहता ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारी अधिकारियों के कार्यों से असहमत होने के बावजूद, कोर्ट उनके बारे में कोई व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचता है।
इसके बाद कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रभारी अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन को वर्चुअल तरीके से कार्यवाही में शामिल होने के लिए कहा और पूछा कि राज्य प्रशासन कलेक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई करने का इरादा रखता है।
जस्टिस मेहता ने नटराजन से कहा कि किसी अधिकारी के आचरण को लेकर जताई गई चिंताओं के मामले में बार-बार माफी मांगना काफी नहीं है।
नटराजन ने कहा कि प्रशासन कोर्ट की टिप्पणियों को गंभीरता से लेगा और उन्होंने अनुरोध किया कि कलेक्टर की माफी पर विचार किया जाए।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह प्रशासन को कोई विशेष कार्रवाई करने के लिए नहीं कह रहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले से जुड़े दस्तावेज, जिनमें धमेलिया का हलफनामा और लंबित अवमानना कार्यवाही का विवरण शामिल है, उन्हें अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाए ताकि वे स्वतंत्र रूप से इस पर विचार कर सकें।
इसके बाद, कोर्ट ने GAD को यह मौका दिया कि वे कलेक्टर के आचरण की स्वतंत्र रूप से जांच करें और कोर्ट को बताएं कि वे उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखते हैं। इसके बाद ही कोर्ट यह तय करेगा कि अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए या नहीं।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
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