

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मद्रास हाई कोर्ट से कहा है कि किसी राजनीतिक पार्टी का प्रमुख होने भर से ही उन्हें पार्टी की अलग-अलग शाखाओं या पदाधिकारियों द्वारा पब्लिश की गई हर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए कानूनी रूप से ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता [आधव अर्जुन बनाम स्टालिन]।
स्टालिन ने तमिलनाडु के मंत्री और 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) नेता आधव अर्जुन द्वारा दायर ₹1 करोड़ के मानहानि के मुकदमे में अंतरिम राहत की याचिकाओं का विरोध करते हुए एक जवाबी हलफनामा (counter-affidavit) दाखिल किया।
अर्जुन ने स्टालिन के खिलाफ यह मुकदमा DMK IT विंग की एक पोस्ट को लेकर दायर किया था, जिसमें उन्हें ₹258 करोड़ के ड्रग तस्करी मामले के एक आरोपी से जोड़ा गया था।
स्टालिन ने तर्क दिया, "सिर्फ इसलिए कि मैं DMK का अध्यक्ष हूं, मुझे पार्टी के विभिन्न विंग या पदाधिकारियों के सोशल मीडिया अकाउंट से प्रकाशित हर पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।"
स्टालिन ने कहा कि हालांकि वे पार्टी के विभिन्न विंग के पदाधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे उनके व्यक्तिगत कार्यों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे। उन्होंने विशेष रूप से इस बात से इनकार किया कि उन्होंने अर्जुन या उनके परिवार को जॉन ब्रिटो नाम के व्यक्ति या ड्रग तस्करी के मामले से जोड़ने वाली किसी पोस्ट का निर्देश दिया था या उसे मंजूरी दी थी।
अर्जुन का मुकदमा जस्टिस के. गोविंदराजन थिलाकावडी के समक्ष लंबित है। हाईकोर्ट ने पहले स्टालिन और DMK IT विंग को नोटिस जारी किया था। स्टालिन द्वारा अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगने के बाद मामले की सुनवाई आज (22 सितंबर) तक के लिए टाल दी गई थी। उन्होंने अर्जुन द्वारा दायर अंतरिम याचिकाओं को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने की मांग की है।
यह विवाद DMK IT विंग की जॉन ब्रिटो से संबंधित एक पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उसे नशीले पदार्थों के मामले में शामिल बताया गया था। उस पोस्ट में ब्रिटो को अर्जुन का रिश्तेदार बताया गया था।
अर्जुन का कहना है कि आरोपी जॉन ब्रिटो उनका रिश्तेदार नहीं है। उन्होंने DMK पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर ड्रग मामले के आरोपी को अर्जुन के रिश्तेदार के साथ मिला दिया, क्योंकि उनके नाम एक जैसे थे।
अर्जुन और ब्रिटो को जोड़ने वाली DMK की पोस्ट बाद में हटा दी गई थी। इसके बाद अर्जुन ने स्टालिन और DMK IT विंग के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया और ₹1 करोड़ के हर्जाने, माफी और निषेधाज्ञा (injunctive relief) की मांग की।
अपने जवाब में, स्टालिन ने कहा कि अर्जुन ने खुद स्वीकार किया था कि जॉन ब्रिटो नाम का उनका एक रिश्तेदार है, जिसने ग्रेटर चेन्नई पुलिस से संपर्क करके दावा किया था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित व्यक्ति नहीं है।
स्टालिन ने अर्जुन और उनके परिवार के कुछ सदस्यों से जुड़े कथित आपराधिक मामलों का भी हवाला देते हुए तर्क दिया कि अर्जुन ने महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किए बिना अदालत का रुख किया था। स्टालिन ने मार्च 2026 के एक भाषण का भी ज़िक्र किया, जिसमें अर्जुन ने कथित तौर पर उन्हें दो बार "मूर्ख मुख्यमंत्री" कहा था। उन्होंने तर्क दिया कि जिस व्यक्ति ने खुद किसी राजनीतिक विरोधी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया हो, वह मानहानि के मुकदमे में अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का दावा नहीं कर सकता।
DMK अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अर्जुन की माफ़ी मांगने, कंटेंट हटाने और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सौंपने की अंतरिम मांगें समय से पहले की गई थीं।
चूंकि विवादित पोस्ट पहले ही हटाया जा चुका था और ऑनलाइन उपलब्ध नहीं था, इसलिए स्टालिन ने तर्क दिया कि उसे हटाने की मांग वाली अर्ज़ी बेअसर हो गई थी।
उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार का भी हवाला दिया और तर्क दिया कि इसमें सार्वजनिक हस्तियों की आलोचना करने की आज़ादी शामिल है। साथ ही, किसी मौजूदा मंत्री की आलोचना करने से विपक्षी पार्टी को रोकने का राजनीतिक बातचीत पर बुरा असर पड़ सकता है।
स्टालिन का पक्ष एडवोकेट रिचर्ड विल्सन रख रहे हैं।
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I can't be held liable for every social media post by DMK wings: MK Stalin to Madras High Court