जेल में बीमार थे, लेकिन अब नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते हैं? टॉमिन थाचनकेरी की याचिका पर केरल हाईकोर्ट

"जेल में रहते हुए, वह कहता है कि उसे कई बीमारियाँ हैं। अब वह नौकरी करने के लिए विदेश जाने की अनुमति माँग रहा है। ऐसी विरोधाभासी बातें क्यों?" कोर्ट ने पूछा।
Ex Kerala DGP Tomin Thachankary
Ex Kerala DGP Tomin Thachankary
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केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को भ्रष्टाचार के आरोपी केरल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) टॉमिन जे. थाचंकरी की एक याचिका में दिख रहे विरोधाभास पर सवाल उठाया। थाचंकरी ने काम के सिलसिले में विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, जबकि इससे पहले उन्होंने जेल में रहने की नौबत आने पर खुद को कई तरह की बीमारियों से पीड़ित बताया था।

थचन्कारी की हालिया याचिका में हाई कोर्ट द्वारा अक्टूबर में लगाई गई शर्तों में ढील देने की मांग की गई है। हाई कोर्ट ने तब आय से अधिक संपत्ति के मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई चार साल की जेल की सजा पर रोक लगा दी थी।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने आज याद दिलाया कि जब थचन्कारी ने निचली अदालत से सजा सुनाते समय नरमी बरतने की अपील की थी, तब उन्होंने दावा किया था कि वे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

जस्टिस बदरुद्दीन ने टिप्पणी की, "जेल में रहते हुए वे कहते हैं कि उन्हें कई बीमारियां हैं। अब वे नौकरी करने के लिए विदेश जाने की अनुमति मांग रहे हैं। ये विरोधाभास क्यों?"

Justice A Badharudeen
Justice A Badharudeen

जज ने इन परस्पर विरोधी रुख को लेकर सवाल उठाए।

जस्टिस बदरुद्दीन ने पूछा, "वह विदेश जाकर नौकरी कैसे कर सकता है? जेल जाने पर उसे लगता है कि वह कई बीमारियों से ग्रस्त है और उसे अस्पताल में भर्ती होना चाहिए, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह विदेश जाकर नौकरी करना चाहता है। ये बातें तो बिल्कुल एक-दूसरे के विपरीत हैं। इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है?"

जज ने आगे कहा कि इस तरह के विरोधाभास न्यायपालिका में जनता के भरोसे को भी कम करेंगे।

जज ने पूछा, "जेल में जाने पर बीमार, और बाहर आने पर एकदम स्वस्थ! यह सब देखकर लोग यही सोचेंगे कि अदालत में बैठे लोगों के पास कोई अक्ल ही नहीं है। जेल में वह गंभीर रूप से बीमार मरीज बन जाता है, लेकिन बाहर आते ही उसे सऊदी अरब या अमेरिका जाने में कोई दिक्कत नहीं होती। भला ऐसा कैसे हो सकता है?"

Justice A Badharudeen
Justice A Badharudeen

जज ने इन परस्पर विरोधी रुख को लेकर सवाल उठाए।

जस्टिस बदरुद्दीन ने पूछा, "वह विदेश जाकर नौकरी कैसे कर सकता है? जेल जाने पर उसे लगता है कि वह कई बीमारियों से ग्रस्त है और उसे अस्पताल में भर्ती होना चाहिए, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह विदेश जाकर नौकरी करना चाहता है। ये बातें तो बिल्कुल एक-दूसरे के विपरीत हैं। इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है?"

जज ने आगे कहा कि इस तरह के विरोधाभास न्यायपालिका में जनता के भरोसे को भी कम करेंगे।

जज ने पूछा, "जेल में जाने पर बीमार, और बाहर आने पर एकदम स्वस्थ! यह सब देखकर लोग यही सोचेंगे कि अदालत में बैठे लोगों के पास कोई अक्ल ही नहीं है। जेल में वह गंभीर रूप से बीमार मरीज बन जाता है, लेकिन बाहर आते ही उसे सऊदी अरब या अमेरिका जाने में कोई दिक्कत नहीं होती। भला ऐसा कैसे हो सकता है?"

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Ill while in jail but now wants to go abroad for job? Kerala High Court on Tomin Thachankery plea