कर्नाटक कोर्ट ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और मोहम्मद नलपाद के खिलाफ RSS के मानहानि मामले पर रोक लगा दी

कोर्ट ने शुरुआती तौर पर मजिस्ट्रेट कोर्ट की इस राय से असहमति जताई कि शिकायतकर्ता के 'लोकस स्टैंडी' का मुद्दा ऐसा है जिस पर शुरुआती चरण में नहीं, बल्कि सिर्फ़ ट्रायल के दौरान ही फ़ैसला किया जाना चाहिए।
Priyank Kharge, RSS
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बेंगलुरु की एक स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में दिए गए बयानों को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाद के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी।

स्पेशल जज के.बी. शिवप्रसाद ने मजिस्ट्रेट कोर्ट की इस राय से शुरुआती तौर पर असहमति जताई कि शिकायतकर्ता का 'लोकस स्टैंडाई' (मुकदमा करने का अधिकार) एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ट्रायल के दौरान ही फैसला किया जाना चाहिए, न कि शुरुआती चरण में।

स्पेशल जज ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आपराधिक मानहानि के मामले में शिकायत दर्ज करने का अधिकार एक ज़रूरी शर्त है।

इसलिए, कोर्ट ने शिकायतकर्ता ए. तेजस को नोटिस जारी किया और मामले से जुड़े रिकॉर्ड मंगाए।

कोर्ट ने कहा, "शिकायत दर्ज करने का अधिकार एक ज़रूरी शर्त है और ऐसी स्थिति में, मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश की इस रिविज़न (पुनरीक्षण) में जांच की ज़रूरत है।"

Judge Shivaprasad KB
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प्रियंक खड़गे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट संदेश चौटा ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ अपने कथित जुड़ाव के बारे में अलग-अलग बातें कही थीं, लेकिन वे ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि वे RSS के सदस्य थे।

इसलिए, यह तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता मानहानि की निजी शिकायत करने के लिए 'पीड़ित व्यक्ति' नहीं था।

उन्होंने आगे कहा कि पीड़ित व्यक्ति कोई निश्चित और पहचाने जाने योग्य व्यक्ति होना चाहिए जिसे कोई खास कानूनी नुकसान हुआ हो। शिकायतकर्ता के RSS सदस्य होने और उसके पीड़ित व्यक्ति होने को साबित करने वाले सबूतों के अभाव में, शिकायत सुनवाई के योग्य नहीं थी।

नलापाद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विक्रम हुइलगोल ने तर्क दिया कि BNS की धारा 356 के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए BNSS की धारा 222(1) के तहत पीड़ित व्यक्ति की शिकायत ज़रूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट अपने मुवक्किल के खिलाफ संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त कारण दर्ज करने में विफल रहे।

कोर्ट ने गौर किया कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता के 'लोकस स्टैंडी' (मुकदमा करने का अधिकार) के सवाल को ट्रायल के दौरान तय किए जाने वाले मुद्दे के तौर पर देखा था।

स्पेशल कोर्ट ने कहा, "शिकायत दर्ज करने का अधिकार एक बुनियादी ज़रूरत है," और कहा कि इस मुद्दे की समीक्षा याचिका में जांच की जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि समन पहले ही जारी किए जा चुके थे और मजिस्ट्रेट ने सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

कोर्ट ने कहा, "अगर मामले में आगे कार्यवाही की जाती है, तो इस समीक्षा का मकसद ही खत्म हो जाएगा।"

इसलिए, उसने ट्रायल की कार्यवाही पर रोक लगा दी।

मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

ये याचिकाएं एडवोकेट शथाबिषा शिवन्ना और परितोष एसएम के ज़रिए दायर की गई थीं।

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Karnataka court stays RSS defamation case against Home Minister Priyank Kharge, Mohammed Nalapad

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