कर्नाटक HC ने अवैध रूप से गिरफ्तार होमस्टे मालिक को 5 लाख का मुआवजा न देने पर दायर अवमानना याचिका मे राज्य को नोटिस जारी किया

याचिका में आरोप लगाया कि राज्य 15 जुलाई के उस आदेश का पालन करने में विफल रही, जिसमें याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित किया गया था और चार हफ़्ते के भीतर मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था।
Karnataka High Court
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार से अदालत की अवमानना ​​की याचिका पर जवाब मांगा। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक आपराधिक मामले में कोडागु के होमस्टे मालिक को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार करने के लिए ₹5 लाख का मुआवज़ा देने के आदेश का पालन नहीं किया गया [पालेकंडा पोनप्पा उर्फ ​​विशाल बनाम शालिनी रजनीश और अन्य]।

होमस्टे के मालिक को पहले 19 अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने होमस्टे में ठहरी एक अमेरिकी टूरिस्ट के साथ हुए रेप की रिपोर्ट नहीं की थी। हालांकि, जुलाई में हाई कोर्ट ने पाया कि गिरफ़्तारी ग़ैर-क़ानूनी थी और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह होमस्टे मालिक के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए उन्हें ₹5 लाख का मुआवज़ा दे। बाद में कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ चल रहे आपराधिक मामले को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया।

होमस्टे के मालिक, पालेकंडा पोनप्पा उर्फ़ विशाल, ने अब हाई कोर्ट में कोर्ट की अवमानना ​​की याचिका दायर की है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार ने जुलाई के उस आदेश का पालन नहीं किया जिसमें उन्हें ग़ैर-क़ानूनी गिरफ़्तारी के लिए मुआवज़ा देने को कहा गया था।

जस्टिस जयंत बनर्जी और जस्टिस के बी गीता की डिवीज़न बेंच ने आज इस याचिका पर होम डिपार्टमेंट के चीफ़ सेक्रेटरी और एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन हफ़्ते बाद तय की है।

Justice Jayant Banerji and Justice K B Geetha
Justice Jayant Banerji and Justice K B Geetha

पोन्नप्पा का कहना है कि 15 जुलाई के आदेश के तहत, कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने राज्य को आदेश दिया था कि वे उन्हें गैर-कानूनी गिरफ्तारी के लिए मुआवज़ा दें। यह भुगतान आदेश मिलने की तारीख से चार हफ़्ते के अंदर किया जाना था।

पोन्नप्पा ने बताया कि राज्य को 15 जुलाई को ही एडिशनल स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के ऑफ़िस के ज़रिए फ़ैसले और आदेश की सर्टिफाइड कॉपी मिल गई थी। उन्होंने आगे कहा कि इस वजह से कोर्ट द्वारा तय की गई चार हफ़्ते की समय-सीमा 12 अगस्त, 2026 को खत्म हो गई। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने 27 जुलाई को राज्य के अधिकारियों को एक नोटिस भेजा था, जिसमें उनसे मुआवज़े के निर्देश का पालन करने को कहा गया था।

हालांकि, पोन्नप्पा की याचिका के अनुसार, अभी तक मुआवज़े की रकम का भुगतान नहीं किया गया है और न ही इसके लिए कोई वजह बताई गई है।

पोन्नप्पा की ओर से वकील अंगद कामत पेश हुए।

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Karnataka HC notice to State in contempt plea for not paying illegally arrested homestay owner ₹5 lakh

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