कर्नाटक HC ने योगेश गौड़ा मर्डर केस मे पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाई और उन्हे ज़मानत दी

बेंगलुरु की एक विशेष CBI अदालत ने BJP नेता योगेश गौड़ा की हत्या की साज़िश रचने का दोषी पाए जाने के बाद कुलकर्णी और 15 अन्य लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
Vinay Kulkarni
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीजेपी नेता योगेश गौडा की 2016 में हुई हत्या के मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक विनय कुलकर्णी और आठ अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि वे अपनी आपराधिक अपीलों के निपटारे तक ज़मानत पर रिहा होने के हकदार हैं।

जस्टिस मोहम्मद नवाज़ और जी बसवराजा की बेंच ने सस्पेंड किए गए पुलिस अधिकारी चन्नाकेशव बी. टिंगरीकर (आरोपी नंबर 19) को सुनाई गई सात साल की सज़ा पर भी रोक लगा दी और उन्हें ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

Justice Mohammed Nawaz and Justice G Basavaraja
Justice Mohammed Nawaz and Justice G Basavaraja

सुनवाई के दौरान, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के वकील राहुल रेड्डी ने बताया कि जब कुलकर्णी को पहले ज़मानत मिली थी, तो उन पर एक शर्त लगाई गई थी कि वे धारवाड़ ज़िले में प्रवेश नहीं करेंगे।

हालांकि, बेंच ने कहा,

"वह ट्रायल के दौरान की बात थी। अब सभी गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।"

बेंगलुरु की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने 17 अप्रैल, 2026 को कुलकर्णी और 15 अन्य लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। उन्हें BJP नेता योगेश गौड़ा की हत्या की साज़िश रचने का दोषी पाया गया था; गौड़ा की 15 जून, 2016 को धारवाड़ के एक जिम में हत्या कर दी गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साज़िश) के तहत दोषी ठहराया था, क्योंकि कोर्ट ने पाया कि उन्होंने गौड़ा को खत्म करने की साज़िश रची थी।

हत्या और साज़िश के लिए उम्रकैद के अलावा, दोषियों को सबूत मिटाने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और दंगा करने के लिए भी सज़ा सुनाई गई थी। सस्पेंड किए गए पुलिस अधिकारी चन्नाकेशव बी. टिंगरीकर (A19) को सबूत मिटाने के लिए IPC की धारा 201 के तहत 7 साल की सज़ा सुनाई गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी सज़ाएं एक साथ चलेंगी और जुर्माने की रकम में से ₹16 लाख गौड़ा के बच्चों को मुआवज़े के तौर पर देने का आदेश दिया।

कुलकर्णी और सह-आरोपी चंद्रशेखर इंडी को आर्म्स एक्ट के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया।

कुलकर्णी को CBI ने 5 नवंबर, 2020 को गिरफ़्तार किया था और अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त ज़मानत दी थी।

हालांकि, जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी, क्योंकि उन्हें ऐसे शुरुआती सबूत मिले जिनसे पता चला कि ट्रायल के दौरान गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।

अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील सी.वी. नागेश, एस. नागामुथु, एम.एस. श्याम सुंदर, पी.पी. हेगड़े और हसमत पाशा, तथा वकील एस. सुनील कुमार, वंदना पी.एल., एन.ए. करियप्पा और सुधानवा डी.एस. पेश हुए।

Senior Advocate CV Nagesh
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Karnataka HC suspends life sentence of ex-Congress MLA Vinay Kulkarni in Yogesh Gowda murder case, grants bail

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