कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं को 1 फरवरी से सामान्य ड्रेस कोड का पालन करने का निर्देश दिया

पिछले साल जून में, कोर्ट ने शारीरिक सुनवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वकीलों को कोर्ट क़े समक्ष उपस्थित होने मे ड्रेस कोड में ढील दी थी।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं को 1 फरवरी से सामान्य ड्रेस कोड का पालन करने का निर्देश दिया
Karnataka High Court

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं के लिए ड्रेस कोड पर छूट वापस लेने का फैसला किया है और सभी वकीलों को 1 फरवरी से सामान्य ड्रेस कोड का पालन करने का निर्देश दिया है।

इस संबंध में जारी संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में कहा गया,

"अधिवक्ताओं के ड्रेस कोड को दी गई छूट इसके द्वारा वापस ले ली गई है। अधिवक्ता 1 फरवरी 2021 से सामान्य ड्रेस कोड का पालन करेंगे।"

पिछले साल जून में, कोर्ट ने शारीरिक सुनवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वकीलों को कोर्ट क़े समक्ष उपस्थित होने मे ड्रेस कोड में ढील दी थी।

इसके अलावा, नए SOP में कई अन्य परिवर्तन शामिल हैं जो 27 जनवरी से प्रभावी होंगे।

मौजूदा काउंटर के बगल में पीएफ / कोर्ट शुल्क दाखिल करने और प्राप्त करने के लिए प्रिंसिपल बेंच, बेंगलुरु में एक अतिरिक्त काउंटर उपलब्ध कराया जाएगा।

सभी बेंचों पर कैंटीन के उपयोग पर प्रतिबंधों को शिथिल किया जाएगा, इस शर्त के अधीन कि कैंटीन में बैठने की क्षमता वर्तमान क्षमता के आधे तक सीमित होगी, छह फीट की दूरी बनाए रखनी होगी, और कैंटीन में हैंड सैनिटाइज़र दिए जायेंगे। कैंटीन में काम करने वाले स्टाफ सदस्यों को थर्मल स्कैनिंग के अधीन किया जाएगा। कैंटीन ठेकेदार को एक वचन देना होता है कि वह सुनिश्चित करेगा कि COVID-19 के लक्षणों वाले किसी भी सदस्य को कैंटीन में काम करने की अनुमति नहीं होगी ।

यह आगे स्पष्ट किया गया है कि वादियों के प्रवेश पर रोक बेंगलुरु और प्रिंसिपल सीट पर धारवाड़ और कालाबुरागी में मौजूदा एसओपी में प्रदान की गई है।

नया एसओपी यह स्पष्ट करता है कि ये उपाय प्रायोगिक आधार पर किए जाएंगे, और अगर यह पाया जाता है कि अधिवक्ता और मुकदमेकर्ता मास्क पहनने और सामाजिक दूरी बनाए के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो छूट वापस ले ली जाएगी।

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Karnataka High Court directs advocates to follow normal dress code from February 1

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