

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी। वकील पर आरोप था कि उसने एक मुक़दमे से जुड़ी महिला से वादा किया था कि अगर हाई कोर्ट के जज को रिश्वत के तौर पर पैसे दिए जाएं, तो उसके बेटे को ज़मानत मिल जाएगी [दायना बानू बनाम कर्नाटक राज्य]।
जस्टिस वी. श्रीशानंदा ने आरोपी वकील की ओर से पेश वकील दायना बानू के यह बताने के बाद याचिका खारिज कर दी कि उन्हें गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर लिया और बानू की अग्रिम ज़मानत याचिका को बेअसर (infructuous) मानते हुए खारिज कर दिया।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब कुछ दिन पहले ही हाई कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह बानू को अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इस मामले में हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है।
कोर्ट ने 9 सितंबर को मौखिक रूप से कहा था, "आरोप है कि जज को देने के लिए रिश्वत ली गई थी। मामला चाहे जो भी हो, हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है। अग्रिम ज़मानत देने का तो सवाल ही नहीं उठता।"
उस समय, कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया था कि बानू जांच एजेंसी या अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के सामने सरेंडर करें और उसके बाद नियमित ज़मानत के लिए आवेदन करें।
यह मामला थेरेसा नाम की महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिनके बेटे, वी विष्णु देवन, को 2021 में एक हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया था।
शिकायत के अनुसार, थेरेसा की मुलाक़ात मरीना फर्नांडीस से हुई, जिसने कथित तौर पर उनके बेटे की ज़मानत के लिए ₹10 लाख की मांग की थी। जब ज़मानत नहीं मिल पाई, तो थेरेसा ने पैसे वापस मांगे। हालाँकि, उन्हें दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए।
इसके बाद थेरेसा की मुलाक़ात एक और महिला, आरती से हुई, जिसने कथित तौर पर दावा किया कि वह हाई कोर्ट के एक जज की करीबी सहयोगी है। आरती ने कथित तौर पर ₹1.72 लाख की मांग की, जिसमें ₹1 लाख कथित तौर पर जज को रिश्वत के तौर पर देने के लिए थे।
इस बीच, वकील दायना बानू पर आरोप है कि उन्होंने बाद में थेरेसा को बताया कि उनके बेटे की रिहाई के लिए हाई कोर्ट के जज को एक बड़ी रकम देनी होगी।
थेरेसा ने शुरू में स्टेट बार काउंसिल से संपर्क किया और आरोप लगाया कि मरीना फर्नांडीस और आरती ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। इसके बाद उन्होंने 18 दिसंबर, 2024 को कर्नाटक हाई कोर्ट को एक पत्र लिखा, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक वकील भी जज को रिश्वत देने के लिए पैसे मांग रहा था।
इसके बाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने शिकायत दर्ज की। इसके आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसमें आरोपियों में बानू का नाम भी शामिल था।
बानू ने पहले आपराधिक मामले को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। हालाँकि, कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए 6 अगस्त को उनकी याचिका खारिज कर दी।
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Karnataka High Court dismisses lawyer's anticipatory bail plea in cash-for-bail case