शिकायत से मुकरने पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने महिला से मारपीट के आरोपी वकील के खिलाफ मामला रद्द किया

शिकायतकर्ता का पुलिस के सामने दिया गया यह बयान कि वकील ने न तो उस पर हमला किया था और न ही उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचाई थी, एक अहम कारण बना जिसके चलते अदालत ने मामले को खारिज कर दिया।
Karnataka High Court Dharwad Bench
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक वकील के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। वकील पर एक महिला के साथ मारपीट करने और उसकी मर्यादा को ठेस पहुँचाने का आरोप था। अदालत ने यह पाया कि शिकायतकर्ता ने खुद ही पुलिस को दिए गए अपने बयान में इन आरोपों से इनकार कर दिया था।

धारवाड़ पीठ में बैठे जस्टिस टी. वेंकटेश नाइक ने 25 सितंबर को एक वकील द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ 2021 में दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।

अन्य बातों के अलावा, अदालत ने जांच अधिकारी द्वारा दर्ज शिकायतकर्ता के एक और बयान पर ध्यान दिया। इस बयान में शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि वकील ने न तो कभी उस पर हमला किया और न ही ऐसा कोई काम किया जिससे उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचे।

Justice Venkatesh Naik T
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यह मामला 2021 में एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से शुरू हुआ। महिला का आरोप था कि वकील ने उसके साथ मारपीट की, उसे भद्दी गालियां दीं, जानबूझकर उसका अपमान किया और उसे जान से मारने की धमकी दी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने बेंगलुरु की फैमिली कोर्ट में चल रहे अपने तलाक के मामले में वकील को अपना पक्ष रखने के लिए काम पर रखा था, जिसके बाद दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ गईं।

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, महिला कथित तौर पर वकील के पैतृक गांव गई और खुद को उसकी पत्नी बताया। बताया जाता है कि इस बात को लेकर उनके बीच झगड़ा हुआ, जिस दौरान वकील ने कथित तौर पर महिला के साथ मारपीट की और उसे धमकी दी।

30 जून 2021 को दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, हनुमासागर पुलिस (कोप्पल जिला) ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद, पुलिस ने वकील के खिलाफ IPC की धारा 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना) के तहत चार्जशीट दाखिल की।

इसके बाद, वकील ने इस कानूनी कार्यवाही को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

वकील के वकील ने तर्क दिया कि शिकायत में गंभीर कमियां और विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा कि महिला ने अपनी शुरुआती शिकायत में वकील पर आरोप लगाए थे, लेकिन जांच के दौरान दिए गए अपने बाद के बयानों में वह अभियोजन पक्ष के मूल दावों से पूरी तरह पलट गई।

राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चार्जशीट में मौजूद सामग्री से कथित अपराधों के होने का पता चलता है, और इन आरोपों की सच्चाई का पता केवल पूरी सुनवाई (ट्रायल) के बाद ही चल सकता है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से IPC की धारा 324 और 354 के तहत अपराध के जरूरी तत्व साबित नहीं होते हैं।

कोर्ट ने 'घाव प्रमाण पत्र' (wound certificate) का हवाला दिया, जिससे पता चलता है कि महिला को कोई चोट नहीं आई थी। इससे इस दावे पर संदेह पैदा होता है कि उसे किसी खतरनाक साधन या हथियार से चोट पहुंचाई गई थी (IPC की धारा 324)। IPC की धारा 354 के तहत लगे आरोप के संबंध में - जो किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने से संबंधित है - कोर्ट ने कहा कि यह तय करने के लिए कि कोई अपराध हुआ है या नहीं, आरोपी का इरादा सबसे महत्वपूर्ण है। इस मामले में, कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई आरोप नहीं है जिससे यह पता चले कि वकील ने शिकायतकर्ता पर यौन उत्पीड़न के इरादे से हमला किया था।

चूंकि कथित अपराधों के लिए जरूरी तत्व मौजूद नहीं थे और शिकायतकर्ता ने बाद में अपने बयान में शिकायत से इनकार कर दिया था, इसलिए कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही को आगे नहीं चलाया जा सकता।

कोर्ट ने कहा, "प्रतिवादी नंबर 2 द्वारा दर्ज कराई गई FIR का कोई ठोस आधार नहीं है।"

कोर्ट ने आगे कहा कि वकील के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसके अनुसार, हाई कोर्ट ने मामले को रद्द करने की याचिका को स्वीकार कर लिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील के. एल. पाटिल पेश हुए।

राज्य की ओर से हाई कोर्ट की सरकारी वकील प्रवीणा वाई. देवरड्डीयावारा पेश हुईं।

शिकायतकर्ता की ओर से वकील विद्याशंकर जी. दलावाई पेश हुए।

[फैसला पढ़ें]

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Karnataka High Court quashes case against advocate accused of assaulting woman after she disowns complaint