कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करने के आरोपी दुकानदार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया

अदालत ने कहा कि आरोप सामान्य और व्यापक प्रकृति के हैं।
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में एक दुकानदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया [इम्तियाज़ नूरुद्दीन चिंचली बनाम कर्नाटक राज्य]।

जस्टिस वेंकटेश नाइक टी ने पाया कि दुकानदार पर लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे।

कोर्ट ने कहा, "ऐसा कोई खास आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता के साथ बदसलूकी की या जान-बूझकर उसका अपमान किया, जिससे शांति भंग होने की स्थिति पैदा हो।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत दर्ज कराने में चार दिन की देरी हुई थी। कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि इस मामले में कोई अपराध नहीं बनता है, इसलिए कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

Justice Venkatesh Naik T
Justice Venkatesh Naik T

बेलगावी के अथानी पुलिस स्टेशन ने जनवरी में दुकानदार इम्तियाज़ नूरुद्दीन चिंचली से जुड़ी घटना के एक वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया था।

आरोप है कि घटना वाले दिन, जब दुकानदार से उसकी दुकान के बाहर लगाए गए बैरिकेड्स के बारे में पूछा गया, तो उसने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। कहा जाता है कि इन बैरिकेड्स की वजह से सड़क पर रुकावट पैदा हो रही थी।

उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 285 (सार्वजनिक रास्ते में रुकावट डालना) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

धारवाड़ बेंच के सामने इस मामले को चुनौती देते हुए, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज करने का कोई आरोप नहीं था। वकील ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता किसी कथित राजनीतिक बयान को व्यक्तिगत कानूनी मुकदमे में नहीं बदल सकता और न ही आपराधिक कानून की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

18 सितंबर को, कोर्ट ने पाया कि शिकायत और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से आरोपी पर लगाए गए अपराधों के ज़रूरी तत्व साबित नहीं होते। इसलिए, कोर्ट ने पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

बेंच ने कहा, "याचिकाकर्ता पर मुख्य आरोप यह है कि जब शिकायतकर्ता ने उससे बैरिकेड्स के बारे में सवाल किया, तो उसने भारत के माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ बयान दिए। ऐसा कोई खास आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की या शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर उसका अपमान किया।"

आरोपी की ओर से वकील नितिन बोलाबंदी पेश हुए।

राज्य की ओर से हाई कोर्ट के सरकारी वकील प्रवीण वाई देवरेड्डीयवारा पेश हुए।

शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व वकील संतोष नरगुंड ने किया।

[आदेश पढ़ें]

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