

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय और रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। उन पर यह आरोप था कि उन्होंने गलत जानकारी फैलाई थी कि इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) का तुर्की के इस्तांबुल में एक कार्यालय है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने मालवीय और गोस्वामी द्वारा दायर उन याचिकाओं को स्वीकार कर लिया, जिनमें उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति एस. रचैया की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने पिछले साल मई में एक आदेश पारित करके, इस विवाद के संबंध में मालवीय और गोस्वामी के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
गोस्वामी और मालवीय के खिलाफ शिकायत कांग्रेस कार्यकर्ता श्रीकांत स्वरूप बी.एन. ने दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों ने एक ऐसा अभियान चलाया, जिसका मकसद यह गलत जानकारी फैलाना था कि तुर्की में स्थित 'इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर' असल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का कार्यालय है।
17 मई 2025 को, मालवीय ने एक वीडियो साझा किया और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस पार्टी का तुर्की में कोई पंजीकृत कार्यालय है।
उन्होंने लिखा, "क्या आप जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी का तुर्की में एक पंजीकृत कार्यालय है? क्या राहुल गांधी बता सकते हैं कि ऐसा करने की क्या जरूरत थी? यह कई मायनों में अजीब और समझ से परे है। भारत को यह जानने का हक है। याद रखें: दुश्मन का दोस्त भी दुश्मन ही होता है।"
यह दावा तब विवादों में आ गया जब यह पता चला कि तस्वीर में दिख रही इमारत 'इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर' है, न कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कोई कार्यालय। कांग्रेस पार्टी की विदेशी इकाई ने भी इस बात से इनकार किया कि तुर्की में उनका कोई कार्यालय है।
रिपब्लिक टीवी ने भी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस विषय से जुड़ी सामग्री प्रसारित की थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जनता को गुमराह करने, कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने और राष्ट्रवादी भावनाओं का फायदा उठाने के लिए चलाए गए एक अभियान का हिस्सा था।
इस शिकायत पर दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) का उल्लेख किया गया है।
मालवीय और गोस्वामी, दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
गोस्वामी ने अदालत को बताया कि रिपब्लिक टीवी के एक कार्यक्रम के डिजिटल संस्करण में कार्यालय की इमारत को लगभग चार सेकंड के लिए दिखाना एक तकनीकी गलती थी, न कि मूल लाइव प्रसारण का हिस्सा।
गोस्वामी की याचिका के अनुसार, यह कार्यक्रम 15 मई 2025 को प्रसारित हुआ था, और बाद में डिजिटल डेस्क के कनिष्ठ कर्मचारियों ने इसके ऑनलाइन संस्करण में वह तस्वीर जोड़ दी थी।
याचिका में आगे कहा गया है कि चैनल ने 20 मई 2025 को वह तस्वीर हटा दी और एक शुद्धि-पत्र (corrigendum) जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती मानी और खेद व्यक्त किया।
गोस्वामी ने दलील दी कि इस घटना को लेकर दर्ज की गई FIR, मामले की सामग्री की ठीक से जांच किए बिना ही दर्ज कर ली गई थी। उन्होंने इस आपराधिक कार्यवाही को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
मालवीय ने भी इसी तरह के आधार पर FIR को चुनौती दी और कहा कि उनके खिलाफ की गई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित थी।
आज अदालत ने उन दोनों की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और FIR को रद्द कर दिया।
मालवीय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुणा श्याम और अधिवक्ता सुयोग हेरेले ई पेश हुए।
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