

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भाजपा आईटी सेल के पूर्व संयोजक अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया। यह प्राथमिकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर उनकी टिप्पणियों की आलोचना करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज की गई थी।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने आज मालवीय द्वारा मामला रद्द करने के लिए दायर की गई याचिका को स्वीकार कर लिया।
मालवीय ने अपने खिलाफ दर्ज एक FIR को चुनौती दी थी। यह FIR भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और 353 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत दर्ज की गई थी।
यह मामला 20 मई, 2025 को 'X' (पहले ट्विटर) पर मालवीय द्वारा की गई एक पोस्ट से जुड़ा है। इस पोस्ट में एक ऐसी तस्वीर थी, जिसका आधा हिस्सा कांग्रेस नेता राहुल गांधी का था और बाकी आधा हिस्सा पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का था।
इस पोस्ट में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना की गई थी। 'ऑपरेशन सिंदूर' पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सीमा-पार सैन्य कार्रवाई थी।
मालवीय ने कांग्रेस नेता पर पाकिस्तान और उसके समर्थकों की भाषा बोलने का आरोप लगाया।
पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि राहुल गांधी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए भारत के प्रधानमंत्री को बधाई क्यों नहीं दी। साथ ही, यह भी पूछा गया कि क्या कांग्रेस नेता पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाकिस्तान' को पाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस पदाधिकारी श्रीधर एम.एम. ने मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। श्रीधर का आरोप था कि यह पोस्ट झूठी, दुर्भावनापूर्ण और उकसाने वाली है, जिससे गांधी और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नफरत भड़क सकती है। इस शिकायत के आधार पर, पुलिस ने 20 मई, 2025 को FIR दर्ज की।
मालवीय ने इस FIR को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि उनकी पोस्ट एक राजनीतिक बयान और जनहित के मुद्दे पर की गई आलोचना थी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
22 मई, 2025 को जस्टिस एस. रचैया ने मामले पर रोक (स्टे) लगा दी। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया, मालवीय पर लगे आरोपों से BNS की धारा 352 के तहत अपराध नहीं बनता है।
आज, कोर्ट ने मालवीय की याचिका को स्वीकार कर लिया और पूरे मामले को ही रद्द कर दिया।
मालवीय की ओर से सीनियर एडवोकेट एम. अरुणा श्याम और एडवोकेट सुयोग हेरेले ई. पेश हुए।
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Karnataka High Court quashes FIR against Amit Malviya over X post on Rahul Gandhi