कर्नाटक हाईकोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग ट्रस्ट के खिलाफ भूमि अतिक्रमण संबंधी आदेश पर रोक लगा दी

कोर्ट ने ट्रस्ट पर ज़मीन पर कब्ज़े के आरोप लगाने और इस मामले की SIT से जांच कराने वाले 17 जुलाई के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है।
Karnataka High Court
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने उस सरकारी आदेश (GO) पर रोक लगा दी है जिसमें 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' से जुड़े 'वेद विज्ञान महा विद्या पीठ ट्रस्ट' (VVMVPT) पर राज्य की ज़मीन पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाया गया था [वेद विज्ञान महा विद्या पीठ ट्रस्ट बनाम कर्नाटक राज्य]।

17 जुलाई के सरकारी आदेश (GO) में ऐसे आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) भी बनाई गई थी।

हालांकि, जस्टिस ES इंदिरेश ने पाया कि ट्रस्ट पर ज़मीन पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाने वाला सरकारी आदेश जारी करने से पहले अधिकारियों ने जॉइंट सर्वे (संयुक्त सर्वेक्षण) नहीं किया, जो कि एक ज़रूरी प्रक्रिया है।

अदालत ने कहा, "कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि अगर किसी व्यक्ति (या इस मामले में याचिकाकर्ता) पर सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाकर कोई कार्रवाई की जाती है, तो ऐसे हालात में प्रभावित व्यक्ति (VVMVPT) की मौजूदगी में जॉइंट सर्वे किया जाना चाहिए और उसके बाद ही संबंधित अधिकारियों को इस मामले में कोई फ़ैसला लेना चाहिए।"

अदालत ने आगे कहा कि यह तय करने से पहले कि VVMVPT ने संबंधित ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, कर्नाटक लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1964 के तहत बताई गई प्रक्रिया का पालन भी किया जाना चाहिए था।

अदालत ने पाया कि इस मामले में ऐसा होता नहीं दिखा। इसलिए, अदालत ने 17 जुलाई के सरकारी आदेश पर रोक लगाकर VVMVPT को अंतरिम राहत दी।

31 जुलाई को जारी अंतरिम आदेश में कहा गया है, "विवादित आदेश से ऐसा लगता है कि संबंधित अधिकारियों ने उस प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। इसे देखते हुए, सुनवाई की अगली तारीख तक 17.07.2026 के विवादित आदेश (एनेक्शर-C) पर रोक रहेगी।"

Justice ES Indiresh
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कोर्ट VVMVPT की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह ट्रस्ट 1981 में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' के तहत बनाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार ने हाल ही में एक SIT बनाई थी। यह SIT दक्षिण बेंगलुरु ज़िले में 'आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउंडेशन' और उससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े के आरोपों की जाँच करेगी।

राज्य का दावा है कि अक्टूबर 2025 में लैंड रिकॉर्ड्स के असिस्टेंट डायरेक्टर द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार, 290 एकड़ 'गोमाला' (सामुदायिक चरागाह) ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया था।

VVMPVT ने इस कदम को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि ट्रस्ट पर कब्ज़े का आरोप लगाने और जाँच शुरू करने से पहले कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

कोर्ट ने इस मामले में राज्य से जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

VVMPVT की ओर से सीनियर एडवोकेट श्रीरंगा और एडवोकेट सुमना नागानंद पेश हुए।

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Karnataka High Court stays land encroachment order against Art of Living trust

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