केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटे के कार से घातक दुर्घटना करने के मामले में दर्ज MACT जज को अग्रिम जमानत दी

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A का हवाला देते हुए, इस मामले में जज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया; इस धारा के तहत किसी नाबालिग के अपराध के लिए वाहन के मालिक और अभिभावक जिम्मेदार होते हैं।
Accident
AccidentImage for representational purposes
Published on: 
4 min read

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी। उनके नाबालिग बेटे की हाल ही में एक कार दुर्घटना में संलिप्तता थी, जिसमें 25 अक्टूबर को एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी।

जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने पाया कि ऐसा कोई संकेत नहीं है कि आरोपी न्यायिक अधिकारी चल रही जांच में सहयोग नहीं करेगा।

अदालत ने कहा, "आपने उनके घर की तलाशी ली और सब कुछ जब्त कर लिया। यह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डालने वाली बात है, चाहे वह जिला जज हों या कोई और। आपके पास ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे लगे कि उन्होंने सहयोग नहीं किया है।"

अदालत ने यह भी सवाल किया कि इस मामले में गिरफ्तारी क्यों जरूरी है।

जस्टिस एडप्पागाथ ने राज्य के वकील से पूछा, "यह कोई विशेष मामला क्यों है? 16 पन्नों की आपत्ति? इसमें कोई शक नहीं कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है... मान लेते हैं कि इस स्तर पर आपके सभी आरोप सच हैं और प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, जिसमें BNS की धारा 105 भी शामिल है... फिर भी, आप उन्हें गिरफ्तार क्यों करना चाहते हैं? आप उन्हें हिरासत में क्यों लेना चाहते हैं?"

अदालत ने आगे कहा,

"इस अदालत के एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर, क्या आपको लगता है कि एक जिला जज सहयोग नहीं करेंगे?... आप जमानत अर्जी का विरोध कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि आप उनकी गिरफ्तारी चाहते हैं। गिरफ्तारी की जरूरत क्यों है?... क्या आपका मतलब यह है कि वे हिरासत में पूछताछ के दौरान ही सच बोलेंगे? एक वकील के मुंह से ऐसी बात सुनना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।"

Justice Kauser Edappagath
Justice Kauser Edappagath

अदालत ने आरोपी न्यायिक अधिकारी को अग्रिम जमानत दे दी।

इससे पहले, 29 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने आरोपी जज को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी थी और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

इस मामले में आरोप है कि 17 साल के एक किशोर ने अपने पिता की मर्सिडीज-बेंज कार चलाई और एक स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे स्कूटर चालक जयबालकृष्णन (55) की मौत हो गई।

एर्नाकुलम के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दुर्घटना के एक दिन बाद, 26 अक्टूबर को उस नाबालिग को जमानत दे दी थी।

राज्य सरकार और जयबालकृष्णन के परिवार ने आरोपी किशोर को मिली जमानत रद्द करने के लिए अपील दायर की है, जो अभी एक सेशन कोर्ट में लंबित है। इस बीच, आरोपी किशोर के पिता, जो मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में जज के पद पर कार्यरत हैं, ने अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

इस न्यायिक अधिकारी को भी मामले में आरोपी बनाया गया है, क्योंकि वे उस कार के रजिस्टर्ड मालिक हैं जिसे आरोपी किशोर चला रहा था, और वे उसके अभिभावक (guardian) भी हैं।

पुलिस द्वारा दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) के तहत अपराध शामिल हैं। इसके साथ ही, इसमें मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MVA) की धारा 181, 183, 199A(1) और 199A(2) भी जोड़ी गई हैं।

धारा 199A के अनुसार, यदि कोई नाबालिग मोटर वाहन से जुड़ा कोई अपराध करता है, तो उसके अभिभावक या वाहन के मालिक को जिम्मेदार माना जाता है। कानूनी अपवादों को छोड़कर, उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है और उन्हें सजा भी दी जा सकती है।

अपनी अग्रिम जमानत याचिका में, आरोपी जज ने दावा किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा घर से गाड़ी ले गया है। उन्होंने कहा कि जब गाड़ी ले जाई गई, तब वे सो रहे थे और उन्हें दुर्घटना के बारे में फोन आने के बाद ही पता चला।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि BNS की धारा 105 के तहत यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी का इरादा ऐसा था या उसे पता था कि उसके काम से किसी की मौत हो सकती है। केवल नाबालिग का पिता होने के नाते, उन पर यह जिम्मेदारी अपने आप नहीं थोपी जा सकती।

मृतक के परिवार ने आरोपी जज को अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध किया है। उनका आरोप है कि दुर्घटना के तुरंत बाद जज के बर्ताव की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी जज किसी दूसरी गाड़ी से दुर्घटना स्थल पर पहुंचे और वहां लगभग तीन घंटे तक मौजूद रहे। उन्होंने मांग की है कि उनके वहां पहुंचने के हालात और वहां हुई बातचीत की जांच की जाए, और यह भी पता लगाया जाए कि क्या कोई सबूत हटाया, बदला या छिपाया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, आज कोर्ट ने आरोपी जज को अग्रिम जमानत दे दी।

आरोपी जज की ओर से सीनियर वकील पी. विजय भानु और वकील जॉन एस. राल्फ पैरवी कर रहे हैं।

पीड़ित परिवार की ओर से वकील एमजी श्रीजीत पैरवी कर रहे हैं।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Kerala High Court grants anticipatory bail to MACT judge booked after his minor son caused fatal car crash