मद्रास HC ने दलबदलू AIADMK विधायकों के इस्तीफे बरकरार रखे, अयोग्यता याचिकाओं के लिए 2 महीने की समय सीमा तय की

अदालत ने कहा है कि इस्तीफ़ा मंज़ूर होने से विधायकों के ख़िलाफ़ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही बेअसर या बेकार नहीं हो गई।
Madras High Court
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मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें उन्होंने AIADMK के टिकट पर चुने जाने के तुरंत बाद 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) पार्टी में शामिल होने वाले छह विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए थे [एग्री कृष्णमूर्ति बनाम स्पीकर]।

हालांकि, चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस अरुल मुरुगन की बेंच ने यह भी कहा कि इस्तीफ़ा मंज़ूर होने से विधायकों के ख़िलाफ़ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही बेअसर या बेकार नहीं हो जाती।

कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को अभी भी उस कार्यवाही पर फ़ैसला करना होगा और उनके फ़ैसले पर संविधान की दसवीं अनुसूची (जो राजनीतिक दल-बदल से संबंधित है) में बताए गए नतीजे लागू होंगे।

इसलिए, कोर्ट ने स्पीकर को निर्देश दिया कि वे पूर्व AIADMK विधायकों के ख़िलाफ़ अयोग्यता की लंबित कार्यवाही पर दो महीने के भीतर फ़ैसला लें।

CJ SA Dharmadhikari and Justice Arul Murugan
CJ SA Dharmadhikari and Justice Arul Murugan

कोर्ट ने AIADMK नेता और पार्टी व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी जिसमें छह AIADMK विधायकों - एस जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा, एसक्की सुब्बैया, सी विजय भास्कर और एमआर विजयभास्कर - के इस्तीफ़े स्वीकार किए गए थे।

इन छह विधायकों ने AIADMK व्हिप का उल्लंघन करते हुए और कॉन्फिडेंस मोशन (विश्वास प्रस्ताव) के दौरान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की अगुवाई वाली TVK सरकार के पक्ष में वोट करने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था। वोटिंग के तुरंत बाद इन विधायकों को TVK में शामिल कर लिया गया और उसी दिन स्पीकर ने उनके इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए।

अपनी याचिका में कृष्णमूर्ति ने तर्क दिया कि जब इन विधायकों के ख़िलाफ़ अयोग्यता की कार्यवाही चल रही थी, तो स्पीकर उनके इस्तीफ़े स्वीकार नहीं कर सकते थे। याचिका में कहा गया कि इस्तीफ़े स्वीकार करने से पहले स्पीकर को एक सार्थक जांच करनी चाहिए थी, खासकर इसलिए क्योंकि हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) और प्रलोभन के आरोप पहले ही लग चुके थे।

कृष्णमूर्ति ने उन गजट नोटिफिकेशन्स को भी चुनौती दी जिनमें इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों की विधानसभा सीटों को खाली घोषित किया गया था। याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 190 के तहत, किसी विधायक के इस्तीफ़े से सीट अपने आप खाली नहीं हो जाती। कोर्ट को बताया गया कि स्पीकर को पहले खुद इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि इस्तीफ़ा स्वेच्छा से और असली है।

आज कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस्तीफ़ा और अयोग्यता अलग-अलग संवैधानिक प्रक्रियाएं हैं, और अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने से स्पीकर को इस्तीफ़े स्वीकार करने से नहीं रोका जा सकता।

स्पीकर की ओर से एडवोकेट जनरल विजय नारायण पेश हुए।

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Madras HC upholds turncoat AIADMK MLAs’ resignations, sets 2-month deadline for disqualification pleas

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