मद्रास उच्च न्यायालय ने भाजपा के नैनार नागेंद्रन के खिलाफ ईडी जांच के लिए डीएमके सांसद की याचिका खारिज कर दी

यह याचिका 'वोट के बदले कैश' घोटाले से जुड़ी है, जिसमें 2014 में तीन लोगों को कथित तौर पर नागेंद्रन के फ़ायदे के लिए मतदाताओं को नकद पैसे बांटते हुए पकड़ा गया था।
Girirajan and Nainar Nagendran
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मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को DMK के राज्यसभा सांसद आर. गिरिराजन की एक याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह 'वोट के बदले कैश' मामले में BJP नेता नैनार नागेंद्रन की जांच करे [गिरिराजन बनाम तमिलनाडु राज्य]।

मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति अरुल मुरुगन की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

फैसले की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हुई है।

गिरिराजन ने आरोप लगाया था कि ED, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करने में विफल रही। उन्होंने इस निष्क्रियता को "मनमाना और अवैध" करार दिया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक विचारों ने शायद एजेंसी को प्रभावित किया हो।

यह याचिका 2024 की एक घटना से जुड़ी है। तीन व्यक्तियों - सतीश, पेरुमल और नवीन - को तांबरम रेलवे स्टेशन पर रोका गया था। उनके पास से ₹4 करोड़ नकद बरामद हुए थे।

याचिका के अनुसार, उन व्यक्तियों ने स्वीकार किया कि यह नकद राशि मतदाताओं को बांटने के लिए थी। यह वितरण कथित तौर पर तिरुनेलवेली संसदीय क्षेत्र से जुड़ा था। गिरिराजन ने दावा किया कि ये फंड नैनार नागेंद्रन को फायदा पहुंचाने के लिए थे, जो उस समय BJP के उम्मीदवार थे।

शुरुआत में तांबरम पुलिस ने एक मामला दर्ज किया था। बाद में इसे CBCID को सौंप दिया गया। जांच एजेंसी ने बाद में भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप भी जोड़ दिए।

गिरिराजन ने तर्क दिया कि ये अपराध PMLA के तहत "अनुसूचित अपराध" (scheduled offences) हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्गीकरण के कारण यह मामला ED के अधिकार क्षेत्र में आ जाता है। उन्होंने दलील दी कि जब्त की गई राशि कानून के तहत "अपराध से अर्जित संपत्ति" (proceeds of crime) की श्रेणी में आती है।

याचिका में ED पर चुनिंदा कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया। इसमें यह बताया गया कि एजेंसी ने राजनीतिक नेताओं से जुड़े अन्य मामलों में तो कार्रवाई की है।

गिरिराजन ने ED को पैसे के लेन-देन (money trail) की जांच करने का निर्देश देने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक था।

हालाँकि, उच्च न्यायालय ऐसे निर्देश जारी करने के पक्ष में नहीं था और उसने याचिका खारिज कर दी।

यह याचिका अधिवक्ता SG प्रभाकरन के माध्यम से दायर की गई थी।

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Madras High Court dismisses DMK MP’s plea for ED probe against BJP’s Nainar Nagendran

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