

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक लॉ स्टूडेंट के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। यह मामला एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ा था, जिसमें श्रीरंगम मंदिर के पास स्थित EVR पेरियार की प्रतिमा को तोड़ने का आह्वान किया गया था [बरानी धरन बनाम तमिलनाडु राज्य]।
कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि कोई अपराध नहीं बनता, क्योंकि उस पोस्ट से कोई अशांति नहीं फैली।
जस्टिस आर. विजयकुमार ने कहा कि वह पोस्ट सिर्फ़ एक राय का इज़हार थी। उससे अलग-अलग गुटों के बीच कोई दुश्मनी नहीं बढ़ी और उस पोस्ट के बाद कोई अप्रिय घटना भी नहीं हुई।
कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता की Facebook पोस्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने सिर्फ़ अपनी यह राय ज़ाहिर की है कि वह मूर्ति हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती है। उस Facebook पोस्ट के बाद कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। पोस्ट करते समय याचिकाकर्ता बेंगलुरु में क़ानून की पढ़ाई कर रहा था। अब उसने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है और वह एनरोल होने वाला है। यह सिर्फ़ एक राय का इज़हार है और इसे दो गुटों के बीच दुश्मनी बढ़ाने वाला नहीं माना जा सकता।"
यह मामला श्रीरंगम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक केस से जुड़ा है। एम. बरानी धरन पर दुश्मनी बढ़ाने, जान-बूझकर अपमान करने और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
सरकारी वकील ने कहा कि धरन, जो उस समय लॉ के छात्र थे, ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया था जिसमें कहा गया था कि मंदिर के पास लगी पेरियार की मूर्ति को तोड़कर हटा देना चाहिए। आरोप था कि इस पोस्ट से लोगों की भावनाएं आहत हुई थीं।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने याचिकाकर्ता से एक हलफनामा (affidavit) दाखिल करने को कहा। धरन ने कहा कि वह पोस्ट अनजाने में हो गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है और उन्होंने वादा किया कि वह इसे दोबारा नहीं दोहराएंगे।
उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि इस केस का उनके कानूनी करियर पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री पूरी कर ली है और जल्द ही एक वकील के तौर पर अपना नाम दर्ज करवाने वाले हैं।
कोर्ट ने हलफनामे और तथ्यों पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि वह पोस्ट केवल एक विचार व्यक्त कर रहा था और उसमें दुश्मनी फैलाने वाले अपराधों की श्रेणी में आने लायक गंभीरता नहीं थी।
कोर्ट ने यह भी पाया कि उस पोस्ट से कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या पैदा नहीं हुई थी।
कोर्ट ने फैसला दिया कि इस केस को आगे बढ़ाने का कोई भी सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
इसलिए, FIR को रद्द कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील आयिरम के. सेल्वकुमार ने पैरवी की।
राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील (आपराधिक मामलों के लिए) बी. थंगा अरविंद ने पैरवी की।
[फैसला पढ़ें]
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
Madras High Court quashes case against law student booked for FB post to break Periyar statue