

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के एक मौजूदा चुने हुए सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि जब तक BCI का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पद और चल रही चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाए।
एन मनोज कुमार, जिन्हें 2019 और 2026 में BCI में केरल बार काउंसिल का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था, ने वकीलों की संस्था के कामकाज और पुनर्गठन से जुड़ी लंबित याचिका के हिस्से के तौर पर दायर एक जवाब हलफनामे में यह अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को आदेश दिया था कि अटॉर्नी जनरल (AG) आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता BCI द्वारा लिए जाने वाले हर फैसले में सक्रिय रूप से भाग लें।
कोर्ट ने यह निर्देश कई याचिकाओं के बाद दिया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि मनन कुमार मिश्रा बिना अधिकार के बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष बने हुए हैं, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
मनोज कुमार ने अब उन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है।
कुमार ने आरोप लगाया है कि मिश्रा राज्य बार काउंसिल के पदाधिकारियों के गठन और चुनाव की प्रक्रिया में दखल दे रहे हैं और BCI में अपने प्रतिनिधियों के चुनाव के संबंध में सदस्यों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य बार काउंसिल द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही वह चुनावी निकाय बनाएंगे जिससे भविष्य में BCI के पदाधिकारी चुने जाएंगे।
कुमार ने कहा, "अगर इन प्रतिनिधियों का चुनाव प्रभावित या बाधित होता है, तो BCI के पदाधिकारियों का बाद का चुनाव भी उसी तरह प्रभावित होगा।"
इसलिए, उन्होंने मांग की है कि BCI के मौजूदा पदाधिकारियों और अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया से पूरी तरह अलग रखा जाए।
कुमार ने आगे कहा कि मिश्रा के लिए यह उचित होगा कि वे तब तक पद और चुनावी प्रक्रिया से दूर रहें जब तक कि राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों का चुनाव और उसके बाद BCI के पदाधिकारियों का चुनाव पूरा न हो जाए।
हलफनामे में कहा गया है, "इस अहम समय में पद पर बने रहने से चुनावी प्रक्रिया में दखल का मौका और प्रोत्साहन मिलता है, भले ही अभी तक कोई वास्तविक दखल न हुआ हो।"
खास बात यह है कि कुमार ने प्रस्ताव दिया है कि इस दौरान BCI का कामकाज और रोज़मर्रा का प्रशासन भारत के अटॉर्नी जनरल या भारत के सॉलिसिटर जनरल की अध्यक्षता वाली एक तदर्थ (ad hoc) समिति को सौंपा जाए।
हलफनामे में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया को दखल के आरोपों से बचाएगी और साथ ही BCI के कानूनी कामकाज को भी जारी रखेगी।
कुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल के BCI के पदेन सदस्य होने के बावजूद, उन्हें काउंसिल की बैठकों के नोटिस और एजेंडा नहीं भेजे गए। कुमार ने BCI ट्रस्ट और PEARL-FIRST ट्रस्ट के गठन और कामकाज, BCI के साथ उनके वित्तीय लेन-देन, BCI और उससे जुड़ी संस्थाओं में नियुक्तियों, और कानूनी शिक्षा केंद्रों के निरीक्षण और मंज़ूरी की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है।
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Manan Kumar Mishra interfering in Bar Council elections: BCI member to Supreme Court