मर्सिडीज कार दुर्घटना: केरल की अदालत ने आरोपी किशोर को मिली जमानत रद्द करने से इनकार किया

17 वर्षीय आरोपी जो अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का बेटा है मर्सिडीज-बेंज कार चला रहा था।25 अक्टूबर की तड़के कोच्चि के चेरानाल्लूर मे उसने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी जिससे उस पर सवार व्यक्ति की मौत हो गई
Accident (image for representative purpose)
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केरल की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को उस 17 वर्षीय किशोर की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया, जिस पर मर्सिडीज-बेंज कार चलाकर एक स्कूटर सवार की जान लेने का आरोप है।

17 वर्षीय आरोपी, जो एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का बेटा है, 25 अक्टूबर की तड़के कोच्चि के चेरानाल्लूर में मर्सिडीज-बेंज कार चला रहा था, तभी उसने एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी, जिससे उस पर सवार जयबालकृष्णन की मौत हो गई।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने 26 अक्टूबर को आरोपी किशोर को जमानत दे दी।

एर्नाकुलम की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने आज राज्य और जयबालकृष्णन के रिश्तेदारों द्वारा JJB के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया।

Kavita Gangadharan
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आरोपी किशोर पर शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 281 और 106(1) के तहत लापरवाही से गाड़ी चलाने और लापरवाही के कारण मौत का कारण बनने के अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। 26 अक्टूबर को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने उसे जमानत दे दी थी।

पीड़ित के परिवार और स्थानीय लोगों के लगातार विरोध के बाद, पुलिस ने इसमें और भी गंभीर धाराएं जोड़ दीं। इनमें BNS की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MVA) की धारा 181, 183, 199A(1) और 199A(2) शामिल हैं।

FIR में किशोर के पिता को भी सह-आरोपी बनाया गया है। वे एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में तैनात हैं।

राज्य सरकार और पीड़ित परिवार, दोनों ने किशोर को मिली जमानत को चुनौती देते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर की।

अदालत ने शुरुआत में खुली अदालत में सुनवाई की, लेकिन अंतिम दिन की सुनवाई बंद कमरे (इन-कैमरा) में की। अदालत ने पुलिस की आलोचना की कि उन्होंने सोशल मीडिया पर उन पोस्ट्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिनमें नाबालिग की पहचान उजागर की गई थी।

जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत, कानून के दायरे में आए किसी बच्चे (CCL) की पहचान उजागर करना मना है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से इसकी अनुमति न ली गई हो।

अदालत ने साइबर पुलिस को निर्देश दिया कि वे किशोर की पहचान उजागर करने वाली सभी पोस्ट्स के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही, पीड़ित परिवार को भी सलाह दी कि वे जुवेनाइल जस्टिस (JJ) अधिनियम के प्रावधानों का पालन करें।

इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने आज आरोपी किशोर के पिता को अग्रिम जमानत दे दी है।

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Mercedes car crash: Kerala court refuses to cancel bail granted to accused teenager