बहू से व्यंग्यात्मक लहजे में बात करना और तंज कसना वैवाहिक जीवन का हिस्सा है: मुंबई अदालत ने सास-ससुर को अग्रिम जमानत दी

अदालत ने कहा कि इन आरोपों के लिये 80 वर्षीय और 75 वर्षीय आवेदकों को हिरासत में लेने की जरूरत नहीं
Mumbai sessions court
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मुंबई की एक सत्र अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत बहू से क्रूरता करने के आरोपी ससुराल के दो बुजुर्गो को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुये कहा कि बहू से व्यंग्यात्मक लहजे मे बात करना या तंज कसना वैवाहिक जीवन का हिस्सा है।

अदालत अग्रिम जमानत के लिये रमेश और मालविका दलाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस बुजुर्ग दंपति और उनके पुत्र के खिलाफ उनकी बहू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (ससुराल के सदस्यों द्वारा क्रूरता), धारा 420 (धोखाधड़ी) 406 (विश्वासघात) और 506 (धमकाना) के आरोप के तहत प्राथमिकी दर्ज करा रखी है।

अदालत ने कहा, ‘‘ ससुराल में प्रथम सूचना देने वाली (बहू) से ब्यंग्यात्मक लहजे में बात करना या तंज कसना वैवाहिक जीवन का हिस्सा है जो प्रत्येक परिवार में होता है। इन आरोपों के लिये पुलिस को 80 वर्षीय और 75 वर्षीय आवेदकों को हिरासत में लेने की आवश्यकता नहीं है।’’

विशेष पाक्सो न्यायाधीश माधुरी बरलिया ने टिप्पणी की कि इनके अलावा, ‘‘आवेदकों के खिलाफ प्राथमिकी में लगाये गये अन्य आरोप सामान्य किस्म के हैं।’’

अदालत ने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि शिकायतकर्ता बहुत ही कम समय आवेदकों के साथ रही है।

अदालत ने कहा कि यही नहीं, जांच एजेन्सी पहले ही उनके खाते सील कर चुकी है और इसमें आगे जांच जारी है। इसलिए आवेदकों को लगातार हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

शिकायतकर्ता बहू का कहना था कि आवेदकों के खिलाफ इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टीगेटिव जनर्सलिस्ट्स की जांच लंबित है और उसने उनके खाते सील कर रखे हैं।

हालांकि, अदालत इस तरह की दलीलों से प्रभावित नहीं हुये क्योंकि मौजूदा प्राथमिकी एक अलग अपराध के बारे में थी।

इन आवेदनों का विरोध करते हुये दलील दी गयी थी कि दलाल दंपत्ति अदालत के अधिकार क्षेत्र से फरार हो सकते हैं और दुबई भाग सकते हैं जहां उनका बेटा रहता है।

अदालत ने आवेदकों को अग्रिम जमानत देते हुये उन्हें अपने पासपोर्ट पुलिस के पास जमा कराने के निर्देश दिये हैं।

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