जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया: 29 करोड़ रूपए में से 1 करोड़ रूपए विेदेशी संबंधों से मिला, सुदर्शन टीवी तथ्यों को चुनकर उठा रहा है

जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया ने एससी में एक आवेदन दायर कर कहा कि चैनल ने सैम वेस्ट्रॉप, जो इस्लामफोबिया लेखो के जाने माने लेखक है के एक लेख को आधार बनाकर उसमें से चुन-चुन कर विभिन्न नामो को उछाला है
Zakat Foundation of India and Supreme Court
Zakat Foundation of India and Supreme Court

सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विवाद के केन्द्र जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुये एक आवेदन दायर कर किया है। आवेदन में कहा गया है कि चैनल इंटरनेट पर उपलब्ध दस्तावेजों में से तथ्यों को अपनी सुविधानुसार चुनकर इनसे निराधार निष्कर्ष निकाल रहा है।

एडवोकेट मृगांक प्रभाकर के जरिये दायर इस आवेदन में जिहाद की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है और सुदर्शन टीवी के ‘निराधारा आरोपों’ का खंडन करते हुये सुदर्शन टीवी की नफरत फैलाने वाली पृष्ठभूमि को उजागर किया गया है।

जकात फाउण्डेशन ने कहा है कि सुदर्शन न्यूज को इस गैर सरकारी संगठन के खिलाफ अपने सारे दावों के लिये ठोस सबूत देने होंगे।

आवेदन में कहा गया है कि चैनल ने यह मान लिया है कि जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया के लिये दानदाताओं का संबंध आतंकवादी गतिविधियों से है। आवेदन में कहा गया है कि चैनल ने और कुछ नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ गहरी जड़े जमाये अपनी क्लांति को ही जाहिर किया है।

आवेदन में कहा गया है कि पहले तो चैनल द्वारा 28 अगस्त को दिखाये गये प्रोमो में जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया का नाम ही नहीं लिया गया।

इसकी बजाये, प्रोमो में कह कर लोगों को उकसाया गया कि ‘‘जरा सोचिए अगर जामिया के जिहादी आपके जिले के कलेक्टर या मंत्रियों के सचिव बनते हैं तो क्या होगा।’’ यहां यह जिक्र करना जरूरी है कि जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति ने कहा है कि यूपीएससी में इस साल चुने गये जामिया के 30 छात्रों मे से 14 हिन्दू और 16 मुस्लिम हैं।
आवेदन में कहा गया

अभ्यर्थियों की विविधता की ओर इंगित करते हुये आवेदन में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अनिवार्य रूप से हर साल दिये जाने वाले दान ‘जकात’ का उपयोग जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया पिछले 11 साल से जरूरतमंद मुसलमान छात्रों को ही नहीं बल्कि सभी धर्मो के अभ्यर्थियों को कोचिंग प्रदान कर रही है।

आवेदन के अनुसार, ‘‘इस साल अंतिम चयन प्रक्रिया के बाद चुने गये 27 अभ्यर्थियों में चार दूसरी आस्थाओं के मानने वाले हैं। इससे पहले के सालों में भी विभिन्न आस्थाओं के कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की थी और जकात फाउण्डेशन से लाभान्वित हुये थे।’’

आवेदन में कहा गया है कि चैनल गूगल से चुने गये तमाम नामों को आधार बना रहा है और वह सैम वेस्ट्रॉप, जिनके बारे में यह सर्वविदित है कि उन्होंने इस्लामफोबिया पर कई लेख लिखे हैं, के एक लेख को अपना आधार बनाया है।

सुदर्शन टीवी द्वारा जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया की टिप्पणी प्राप्त करने के प्रयासों के बारे में इस संगठन के आयोजक इसे अधमने तरीके से किया गया प्रयास बताते हैं और कहते हैं कि चैनल ने जब इंटरव्यू के लिये संपर्क किया तो 26 अगस्त को उससे ईमेल के माध्यम से प्रश्न मांगे गये थे जिसका कोई जवाब नहीं मिला।

दूसरी बात, आवेदन में कहा गया है कि 12 सितंबर को चैनल ने शाम आठ बजे होने वाले कार्यक्रम के लिये उसी दिन शाम शाम छह बजे भेजी गयी ईमेल पर उनसे प्रतिक्रिया मांगी थी।

जकात फाउण्डेशन ने कहा है उसे आज तक 29,95,02,038.00 (उनतीस करोड़ पिचानबे लाख दो हजार अड़तिस रूपए) रूपए चंदा प्राप्त हुआ जिसमे से 1,47,76,279.00 (एक करोड़ सैंतालिस लाख छिहत्तर हजार दो सौ उनासी रूपए) विदेश में स्थित चार स्रोतों से प्राप्त किये गये जिनका जिक्र चैनल ने किया है।

जकात फाउण्डेशन ऑफ इंडिया को चार स्रोतों से मिला कुल चंदा, जिसे चैनल ने संदिग्ध बताया है, अब तक धर्मार्थ कार्य के लिये मिले कुल चंदे का 4.93 प्रतिशत है।
आवेदन के अनुसार

धन के स्रोत का प्रतिवाद करते हुये आवेदक संगठन ने कहा है कि मदीना ट्रस्ट ब्रिटेन में पंजीकरण एक छोटी धर्मार्थ संस्था है।

आवेदन के अनुसार, ‘‘एक संस्था के अध्यक्ष अंबाला के रहने वाले 88 वर्षीय सेवानिवृत्त सज्जन श्री जिया उल हसन हैं और वह जहा एकाउन्टेंट के रूप में काम करते थे, वहीं शिफ्ट हो गये थे। उनकी पत्नी सहारनपुर की रहने वाली हैं। वे भारत में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते रहते हैं और उन्होंने कहा है कि उनकी धर्मार्थ संस्था ने कभी किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया है और न ही ऐसा करने की उनकी कोई इच्छा है।"

चैनल ने कहा था कि इंग्लैंड और वेल्स के चैरिटी कमीशन के रिकार्ड के अनुसार मदीना ट्रस्ट के ट्रस्टी डा जाहिद अली परवेज इस्लामिक फाउण्डेशन के भी ट्रस्टी हैं। द टाइम्स, यूके की खबर थी कि इस्लामिक फाउण्डेशन के दो ट्रस्टी संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन तलीबान और अल कायदा संयुक्त राष्ट्र से संबंध रखने वाले व्यक्तियों की सूची में हैं।

जहां तक मुस्लिम एड (यूके) का संबंध है तो आवेदन में कहा गया है कि ब्रिटेन ने खुद ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया होता अगर इसका आतंकी संपर्क होते।

जाकिर नायक के बारे में आवेदन में कहा गया है कि जकात फाउण्डेशन आफ इंडिया इंटरनेशनल एक अलग संस्था है जो ब्रिटेन के कानून के तहत पंजीकृत एक छोटी धर्मार्थ कंपनी है।

आवेदन के अनुसार, ‘‘भारतीय मूल के दो ब्रिटिश निदेशक है, जो ब्रिटेन मे रहते हैं। इनमे से एक डा जफर कुरैशी (75) मनोरोग चिकित्सक हैं जो हैदराबाद के रहने वाले हैं और बर्मिंघम में रहते हैं। वर्ष 2012 से 2016 के दौरान वह जाकिर नायक की कुछ ब्रिटिश कंपनियों से व्यक्तिगत रूप से जुड़े थे लेकिन इस व्यक्ति के खिलाफ भारत सरकार द्वारा दोषी लगाये जाने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इनसे इस्तीफा दे दिया।’’

जकात फाउण्डेशन ने कहा है कि उसने किसी भी सरकार विरोधी से कभी भी धन नहीं लिया है और सावधानी के तौर पर इन चारों व्यक्तियों के साथ ही अन्य दानदाताओं के बारे में अपेक्षित जानकारी हर साल सरकार को सौंपी गयी है।

आवेदन के अनुसार चूंकि सुदर्शन न्यूज ने दावा किया था कि जकात फाउण्डेशन आफ इंडिया ने अपने एक कार्यक्रम में थोड़ा संदेह वाला ध्वज दिखाया था, तो इस बारे में यही कहना है कि उस झण्डे का भारतीय ध्वज से कोई संबंध नहीं है क्योंकि जिस ध्वज का जिक्र किया गया है वह ‘वतन की फिक्र’ की पहल है जो फाउण्डेशन की प्रमुख परियोजनाओं से संबंधित है और जिसके संयोजक जकात फाउण्डेशन के अध्यक्ष हैं।’’

जकात फाउण्डेशन ने कहा है कि जकाह मुसलमानों की संपत्ति पर बकाया निर्दिष्ट धन है जिसका वितरण इसके पात्र लोगों में किया जायेगा। कानूनी भाषा में यह संपत्ति पर हक या फिर अल्लाह द्वारा नामित धन के निश्चित हिस्सा जिसे कतिपय निर्धारित लोगों को दिया जायेगा।

अपने यूपीएससी कार्यक्रम के बारे में जकात ने आवेदन में कहा है कि वह संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगात्मक परीक्षाओं के लये ‘जकात फाउण्डेशन आफ इंडिया फेलो’ अर्थात प्रतिभाशाली और उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने में दिलचस्पी रखने वाले अभ्यर्थियों के रूप में सीमित संख्या लोगों का चयन करती है और उनके आवास तथा कोचिंग की व्यवस्था करती है।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘आल्ट न्यूज’ तथ्यों की परख करने के लिये जानी जाती है और उसने उस घटनाओं की सूची तैयार की है जब सुदर्शन न्यूज ने देश के भीतर सांप्रदायिक विघटन पैदा करने के प्रयास किये हैं। सुदर्शन न्यूज और खतरनाक, सांप्रदायिक विघटनकारी गलत सूचनाओं का इतिहास अक्ट्रबर 2019 के लिंग के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

न्यूज चैनल लगातार एक समुदाय विशेष के खिलाफ सक्रिय है। इस चैनल ने नौकरी का विज्ञापन निकाला था जिसमे यह शर्त थी कि मुस्लिम आवेदन नहीं कर सकते। इस तरह की गतिविधियां निश्चित इस तथ्य को दर्शाता है कि चैनल के मन में एक समुदाय के प्रति कितना नफरत है और उसकी सोच देश के सामाजिक ताने बाने के लिये कितनी खतरनाक हैं।
आवेदन के अनुसार

इस आवेदन में यह भी कहा गया है कि सुदर्शन टीवी चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके को धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्यता पैदा करने के आरोप में अप्रैल 2017 में लखनऊ हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया था।

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