लोग चुनाव में हार के बाद आवेश में आकर चुनौती देते हैं, लेकिन बाद में नतीजे स्वीकार कर लेते हैं: मद्रास हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि चुनावी हार से निराशा के कारण कानूनी मामले हो सकते हैं, लेकिन जो लोग बाद में नतीजों को स्वीकार कर लेते हैं, उन्हें सज़ा देने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि चुनाव में हार के बाद निराशा के कारण लोग कभी-कभी चुनाव नतीजों को कोर्ट में चुनौती देते हैं, लेकिन बाद में वे नतीजों को स्वीकार कर लेते हैं। [एस वासु बनाम सेंथामिजसेल्वन]

जस्टिस डी भरथा चक्रवर्ती ने सिरकाझी विधानसभा क्षेत्र से DMK विधायक आर. सेंथिलसेल्वन के चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए यह टिप्पणी की।

जज ने कहा, "जब कोई चुनाव हार जाता है, तो उस मानसिकता को समझा जा सकता है। तब वे याचिका दायर करते हैं। कम से कम इस व्यक्ति को जल्द ही यह बात समझ आ गई। मुझे उनका हौसला बढ़ाना चाहिए, न कि उन्हें हतोत्साहित करना चाहिए।"

जज ने आगे कहा कि इंसानी फितरत को देखते हुए ऐसी प्रतिक्रियाएं समझ में आती हैं।

जस्टिस भरथा चक्रवर्ती ने कहा, "आखिरकार हम सभी इंसान ही हैं।"

ये टिप्पणियां एस. वासु द्वारा दायर चुनाव याचिका को वापस लेने के आवेदन पर सुनवाई के दौरान की गईं।

Justice D Bharatha Chakravarthy
Justice D Bharatha Chakravarthy

कोर्ट ने कहा कि उसने पहले एक विस्तृत आदेश जारी किया था जिसमें 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act, 1951) और चुनाव याचिकाओं को वापस लेने से जुड़े नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने नोट किया कि ज़रूरी पब्लिकेशन (सूचना प्रकाशित करना) हो चुका था और 15 दिन की कानूनी समय-सीमा भी पूरी हो चुकी थी।

इस दौरान, किसी ने भी चुनाव याचिका को आगे बढ़ाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। याचिका वापस लेने पर किसी ने कोई आपत्ति भी नहीं जताई।

इसके बाद, कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और बिना कोई खर्च (costs) लगाए चुनाव याचिका को खारिज कर दिया।

जज ने रजिस्ट्री को यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट (सुरक्षा राशि) को बिना किसी अलग आवेदन की मांग किए वापस कर दिया जाए।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उसके आदेश की जानकारी भारत के चुनाव आयोग को दी जाए।

'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत, चुनाव याचिकाएं केवल याचिकाकर्ता की मर्ज़ी से वापस नहीं ली जा सकतीं। याचिका वापस लेने के लिए हाई कोर्ट की अनुमति ज़रूरी है, और तय प्रक्रिया के तहत योग्य व्यक्तियों को याचिकाकर्ता की जगह लेने और कार्यवाही जारी रखने की अनुमति होती है।

इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव से जुड़ी चुनौतियों को निजी तौर पर वापस न लिया जाए, और अन्य योग्य व्यक्तियों को आरोपों पर आगे बढ़ने का मौका मिले।

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People challenge election defeats in the heat of the moment, later accept results: Madras High Court

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