

मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में पत्रकार और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की जांच की मांग की गई है। साथ ही, न्यायपालिका के खिलाफ कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के चलते उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की भी मांग की गई है [गणेश कुमार बनाम क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी]।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि अगर दास विदेशी नागरिक पाया जाता है, तो उसका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने का निर्देश दिया जाए।
इसके अलावा, न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान देने के लिए, दास के X (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने दास, केंद्र सरकार और कुछ निजी पक्षों सहित अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
याचिकाकर्ता गणेश कुमार ने आरोप लगाया है कि दास (जिसे याचिका में 'योगेश शर्मा उर्फ सौरव दास' के रूप में पहचाना गया है) ने न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए हैं।
याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे दास और उसके माता-पिता सहित कई लोगों की पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत विवरणों की जांच करें।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका के साथ संलग्न कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया, जो कथित तौर पर दास की पहचान और पते से जुड़े हैं।
बेंच ने इन दस्तावेजों की जांच की और उनमें दर्ज कुछ जानकारियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा।
वकील ने कोर्ट का ध्यान उन बयानों की ओर भी दिलाया जो कथित तौर पर दास ने न्यायपालिका के खिलाफ दिए थे। बेंच ने इन बयानों को देने के तरीके पर सवाल उठाया। इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने इस संबंध में अधिकारियों के पास कोई शिकायत दर्ज कराई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि एक शिकायत पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
याचिका में 7 अक्टूबर, 2026 की एक शिकायत का जिक्र किया गया है और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे कोर्ट द्वारा तय की गई एक उचित समय-सीमा के भीतर इस पर कार्रवाई करें।
जांच के अलावा, याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को निर्देश देने की भी मांग की है कि वे 'सौरव दास' नाम से चल रहे X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम अकाउंट्स को ब्लॉक करें।
याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि दास को न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आगे कोई अपमानजनक बयान देने से रोका जाए।
शुरुआती दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने आज इस मामले में नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील बी. जगन्नाथ पेश हुए।
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