पश्चिम बंगाल SIR से बाहर होने के बाद लोगो को राशन नही मिलने का दावा करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कलकत्ता HC जाएं

याचिका में कहा गया है कि अगर राज्य सरकार लिंकेज को अपने आप लागू करती है तो 35 लाख से 60 लाख राशन कार्ड इनएक्टिव हो सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक पिटीशनर से कहा कि वह अपनी अर्जी के साथ कलकत्ता हाई कोर्ट जाए। इसमें पश्चिम बंगाल में राशन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से लोगों के नाम हटाने को चुनौती दी गई है, क्योंकि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया था।

इस याचिका का ज़िक्र जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की वेकेशन बेंच के सामने किया गया।

Justice BV Nagarathna & Justice Joymalya Bagchi
Justice BV Nagarathna & Justice Joymalya Bagchi

खेती-बाड़ी करने वाले मज़दूरों की यूनियन पश्चिम बंगा खेत मजूर समिति की तरफ़ से फ़ाइल की गई पिटीशन में, पश्चिम बंगाल फ़ूड एंड सप्लाइज़ डिपार्टमेंट के 4 जून के ऑर्डर और महिला एवं बाल विकास और सोशल वेलफ़ेयर डिपार्टमेंट के 19 मई के नोटिफ़िकेशन को चुनौती दी गई है।

दोनों ही पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) और अन्नपूर्णा योजना के तहत बेनिफ़िशियरी स्टेटस को SIR एक्सरसाइज़ के दौरान बनी क्लासिफ़िकेशन से जोड़ते हैं, जिसमें डेड, शिफ़्टेड, डिलीटेड और एब्सेंटी इलेक्टर जैसी कैटेगरी शामिल हैं।

पिटीशन में कहा गया है कि अगर राज्य इस लिंकेज को मैकेनिकली लागू करता है, तो 35 लाख से 60 लाख राशन कार्ड इनएक्टिव हो सकते हैं।

पिटीशनर की तरफ़ से पेश हुए एडवोकेट प्रसन्ना कुमार ने बेंच को बताया कि कोर्ट ने एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया मामले में पहले ही SIR प्रोसेस को सही ठहराया है और दूसरे राज्य भी SIR के नतीजों को वेलफ़ेयर के हक़ से जोड़ने का ऐसा ही पैटर्न अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले को तुरंत लिस्ट करने की ज़रूरत है।

पिटीशन में कहा गया है कि यह लिंकेज आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि SIR एक्सक्लूजन से आर्थिक कमजोरी या नागरिकता का स्टेटस तय नहीं होता है, यह बात कोर्ट ने खुद ADR जजमेंट में साफ की थी।

इसमें यह भी कहा गया है कि यह एक्शन एक कानूनी मकसद (इलेक्शन रिवीजन) के लिए इकट्ठा किए गए डेटा का गलत इस्तेमाल है, जिसका इस्तेमाल पूरी तरह से अलग मकसद (वेलफेयर एलिजिबिलिटी) के लिए किया जा रहा है।

जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि पिटीशन आर्टिकल 32 के तहत क्यों फाइल की गई थी, यह देखते हुए कि इसने पूरी तरह से एक अलग वजह उठाई है, यानी, क्या राशन कार्ड बंद कर देने चाहिए या क्या ऐसे लोगों को PDS के तहत बेनिफिशियरी का हिस्सा बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सवाल कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने जाना चाहिए।

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Plea claims people not getting rations after West Bengal SIR exclusion: Supreme Court says approach Calcutta HC

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