मद्रास हाईकोर्ट में TASMAC की ऑनलाइन शराब बुकिंग सुविधा को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई

याचिका में तमिलनाडु सरकार के उस फ़ैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें शराब से होने वाली कमाई बढ़ाने के उपाय सुझाने के लिए एक कमिटी बनाने को कहा गया था।
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मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) की हाल ही में शुरू की गई ऑनलाइन शराब बुकिंग सुविधा को चुनौती दी गई है।

'एडवोकेट्स फोरम फॉर सोशल जस्टिस' के प्रेसिडेंट और वकील के. बालू ने एक याचिका दायर की है। इसमें TASMAC को उसके ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल और QR कोड-बेस्ड कलेक्शन सिस्टम को चलाने से रोकने के लिए अंतरिम रोक (interim injunction) की मांग की गई है।

इस सुविधा के तहत 21 साल और उससे ज़्यादा उम्र के ग्राहक शराब की उपलब्धता और उसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) देख सकते हैं, ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं और QR कोड का इस्तेमाल करके चुने हुए TASMAC आउटलेट से अपनी शराब ले सकते हैं। इसमें होम डिलीवरी की सुविधा नहीं है।

याचिका में TASMAC के 7 अगस्त के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है जिसमें यह सुविधा शुरू की गई थी। इसमें कहा गया है कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम को 'तमिलनाडु लिकर रिटेल वेंडिंग (इन शॉप्स एंड बार्स) रूल्स, 2003' में बिना किसी बदलाव के, सिर्फ़ एग्जीक्यूटिव निर्देशों के ज़रिए शुरू किया गया था।

याचिका में कहा गया है, "कानूनी ढांचा शराब को रेगुलेट करने, उस पर रोक लगाने और आखिरकार उसे प्रतिबंधित करने के लिए बनाया गया था, न कि उसके कमर्शियल डिस्ट्रीब्यूशन को आधुनिक या आसान बनाने के लिए।"

बालू ने तर्क दिया है कि इस सुविधा से शराब आसानी से मिल जाती है और यह संविधान के आर्टिकल 47 के खिलाफ है, जिसके तहत राज्य को सेहत के लिए नुकसानदायक नशीले पेय पदार्थों पर रोक लगाने की कोशिश करनी चाहिए।

याचिका में ग्राहकों की उम्र वेरिफाई करने के तरीके पर भी चिंता जताई गई है। याचिका के मुताबिक, यह सिस्टम इस बात की पुष्टि करने के लिए कि ग्राहक कम से कम 21 साल का है, खुद की घोषणा (self-declaration) और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) वेरिफिकेशन पर निर्भर करता है।

इसमें तर्क दिया गया है कि कोई नाबालिग किसी दूसरे व्यक्ति के अकाउंट का इस्तेमाल करके ऑर्डर दे सकता है या ट्रांसफरेबल QR कोड का इस्तेमाल करके बोतलें ले सकता है।

याचिका में कहा गया है, "स्टोर से शराब लेने के लिए ट्रांसफरेबल QR कोड बनाने से एक ऐसी कमी (loophole) पैदा होती है कि जिसके पास भी QR कोड हो, वह काउंटर से बोतलें ले सकता है।"

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि TASMAC के कर्मचारी पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं और ऑनलाइन सुविधा से उनका काम का बोझ बढ़ सकता है, साथ ही रिटेल आउटलेट पर भीड़ को संभालने और कानून-व्यवस्था की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इसमें आरोप लगाया गया है कि 8 और 9 अगस्त के बीच पोर्टल के ज़रिए लगभग ₹20 लाख की शराब बेची गई।

याचिका में 24 जुलाई के उस सरकारी आदेश के एक हिस्से को भी चुनौती दी गई है जिसमें 'रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन कमेटी' (राजस्व बढ़ाने वाली समिति) का गठन किया गया था। समिति के काम की शर्तों (terms of reference) में से एक यह है कि वह शराब के रेगुलेशन और टैक्स पॉलिसी में बदलाव करके इंसानों के पीने लायक शराब से राजस्व बढ़ाने के तरीकों की सिफारिश करे। बालू का तर्क है कि शराब से होने वाली कमाई बढ़ाने के उपायों पर विचार करने के लिए सरकारी समिति बनाना, अनुच्छेद 47 के तहत राज्य की संवैधानिक ज़िम्मेदारी के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता ने यह घोषणा करने की मांग की है कि ऑनलाइन बुकिंग स्कीम और शराब से होने वाली कमाई से जुड़ी समिति का काम असंवैधानिक है और तमिलनाडु निषेध अधिनियम, 1937 के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता का पक्ष वकील एम.आर. इलावरसन और वी. शिवरामन रख रहे हैं।

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Plea in Madras High Court challenges TASMAC online liquor booking facility

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