

गुजरात की गैर-लाभकारी संस्था 'जस्टिस ऑन ट्रायल' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के खिलाफ दायर 10,000 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया है।
'जस्टिस ऑन ट्रायल' ने तर्क दिया था कि BBC की दो-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' ने भारत की प्रतिष्ठा, उसकी न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
3 सितंबर को जस्टिस तुषार राव गेडेला के सामने NGO की ओर से वकील सिद्धार्थ शर्मा पेश हुए और कहा कि उन्हें केस वापस लेने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि उसी आधार पर एक नया केस दायर किया जाएगा।
कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और कहा कि केस "वापस लिए जाने के कारण खारिज" माना जाएगा।
NGO का केस वापस लेने का फैसला कोर्ट द्वारा केस की स्वीकार्यता (maintainability) पर बार-बार सवाल उठाए जाने के बाद आया है। कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया था कि भले ही केस 2023 में दायर किया गया था, लेकिन उसके बाद बार-बार सुनवाई टालने (adjournment) की मांग की गई।
15 अप्रैल, 2026 को कोर्ट ने सुनवाई टालने की मांग करने के लिए NGO पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया।
यह केस 2023 में दायर किया गया था। हाई कोर्ट ने केस में वादी (plaintiff) द्वारा दायर 'इंडिजेंट पर्सन एप्लीकेशन' (IPA) पर नोटिस जारी किया था और BBC से जवाब मांगा था।
कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर (CPC) के ऑर्डर 33 के तहत, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पास पैसे की कमी है (indigent person) और जो कोर्ट फीस नहीं भर सकता, वह बिना पहले से भुगतान किए मुकदमा या अपील दायर कर सकता है।
चूंकि दिल्ली हाई कोर्ट में कोर्ट फीस मुकदमे से जुड़े मामले या दावे की मौद्रिक कीमत (monetary value) पर आधारित होती है, इसलिए 'जस्टिस फॉर ट्रायल' को अपना केस आगे बढ़ाने से पहले कोर्ट फीस के तौर पर करोड़ों रुपये चुकाने पड़ते। इसलिए, उसने अपने मुकदमे के साथ IPA दायर किया।
कोर्ट ने IPA पर नोटिस जारी किया था, न कि मुकदमे पर।
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PM Modi documentary: Gujarat NGO withdraws defamation case in Delhi High Court against BBC