पंजाब सरकार ने CM भगवंत मान के OSD के खिलाफ CBI जांच के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

हाई कोर्ट ने CBI को दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
Bhagwant Mann and Supreme Court
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पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफ़िस से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था [स्टेट ऑफ़ पंजाब बनाम निखिल सराफ़]।

सरकार ने मंगलवार को तड़के करीब 1:42 बजे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की।

राज्य की ओर से पेश सीनियर वकील विकास सिंह ने आज मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की और राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों का ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा, "मैं पंजाब राज्य की ओर से पेश हो रहा हूं। ये सभी हमारे अधिकारी हैं। यह मामला ट्रांसफर, पोस्टिंग और उन सभी आरोपों से जुड़ा है। ऐसा लगता है कि चुनाव के समय इस तरह के मामले मनगढ़ंत तरीके से खड़े किए जा रहे हैं।"

सिंह ने आगे कहा कि यह मामला देश के संघीय ढांचे से जुड़ा है।

सीनियर वकील ने कहा, "मामला ज़रूरी है। वरना, यह सचमुच... राज्य में चुनाव होने वाले हैं। यह संघीय ढांचे से जुड़ा एक स्पष्ट मामला है, जिसका उल्लंघन हो रहा है। मैं बस इतना कह रहा हूं कि इसमें कुछ ज़रूरी बात है। वरना मैं ऐसी मांग नहीं करता।"

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को लिस्ट किया जाएगा।

सोमवार सुबह हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने CBI से अपनी जांच पर दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज करने को कहा था।

ED के अनुसार, नितिन गोहल नाम के एक व्यक्ति ने सरकार से फायदा चाहने वाले लोगों और घुमन के बीच बिचौलिए का काम किया। ये आरोप ट्रांसफर, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियारों के लाइसेंस दिलाने और अन्य लाभों से जुड़े हैं।

पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने के बाद, वकील निखिल सराफ ने इस निष्क्रियता को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की।

PIL पर अपने फैसले में, हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ED द्वारा दी गई जानकारी से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि उच्च सार्वजनिक पद पर रहते हुए संज्ञेय अपराध किए गए हैं, जिनसे जनहित को खतरा हो सकता है।

कोर्ट ने पाया कि 3 अगस्त को ED से जानकारी मिलने के बाद पंजाब ने सिर्फ़ एक तरह की "शुरुआती जांच" ही की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई लोगों को नोटिस तो भेजे गए, लेकिन मान के OSD को जांच में शामिल होने के लिए नहीं कहा गया।

कोर्ट ने यह भी पाया कि पंजाब पुलिस ED के दस्तावेज़ों की साफ़ कॉपी मांगने के बहाने मामले में देरी कर रही थी।

कोर्ट ने कहा कि ED की तरफ़ से भेजी गई जानकारी में दोषी ठहराने लायक सबूत थे और उम्मीद थी कि राज्य पुलिस इस पर ज़िम्मेदार प्रतिक्रिया देगी।

कोर्ट ने कहा, "ED की तरफ़ से दी गई जानकारी से पहली नज़र में भ्रष्टाचार के मामलों में बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत मिलता था और कम से कम FIR दर्ज की जानी चाहिए थी ताकि मामले की ठीक से जांच हो सके। पंजाब पुलिस ने ऐसा नहीं किया।"

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Punjab moves Supreme Court against P&H High Court order for CBI probe against CM Bhagwant Mann's OSD

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