

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) नेता मोहम्मद आजम खान की याचिका पर 16 नवंबर को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे। आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है; यह गिरफ्तारी उन्हें एक अन्य मामले में जेल से रिहा किए जाने के तुरंत बाद की गई थी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायमूर्ति सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि हालांकि खान के इस तर्क में कुछ दम हो सकता है कि उनके खिलाफ राजनीतिक द्वेष से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अदालत इस मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देगी और इसे उच्च न्यायालय पर छोड़ देगी।
खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, "एक ECIR है, लेकिन 28 मामले दर्ज हैं। जरा दस्तावेज तो देखिए। यह पूरी तरह से उत्पीड़न है। यह अदालत इसकी अनुमति नहीं दे सकती। कृपया पेज 197 देखें। 2006 की किसी घटना के लिए, जब मैं सत्ता में भी नहीं था, कोई 2019 में FIR कैसे दर्ज कर सकता है?"
CJI ने टिप्पणी की, "आपके तर्क में कुछ दम हो सकता है, लेकिन हम इस पर कोई राय नहीं देना चाहते।"
इसलिए, अदालत ने खान को उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया और उच्च न्यायालय से कहा कि वह इस मामले की सुनवाई को प्राथमिकता दे।
इसके लिए, अदालत ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से कहा कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय के संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले प्राधिकारी के समक्ष रखें (भले ही छुट्टियां चल रही हों) और 16 नवंबर को उच्च न्यायालय की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के समक्ष मामले को सूचीबद्ध करने के लिए आवश्यक आदेश प्राप्त करें।
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, "हमें लगता है कि याचिकाकर्ता के लिए सबसे उचित कदम यह होगा कि वह सबसे पहले संबंधित उच्च न्यायालय में जाए। हालांकि, सुनवाई में तेजी लाने के लिए, हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह इस याचिका के मूल रिकॉर्ड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेज दे। ये रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर भेजे जाने चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय के संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले प्राधिकारी के समक्ष रखें (भले ही छुट्टियां चल रही हों) और 16 नवंबर, 2026 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध करने के लिए आवश्यक आदेश प्राप्त करें।"
इसके अलावा, उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया कि वह उस तारीख पर अंतरिम राहत की मांग पर भी विचार करे।
पीठ ने आगे कहा, "यदि उचित लगे, तो संशोधित मांगें (प्रेयर्स) और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की छूट दी जाती है। हमने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। सभी दलीलें खुली रखी गई हैं।"
ED का यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया गया था।
ED ने 2019 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई लगभग 26 प्राथमिक सूचना रिपोर्टों (FIR) के आधार पर खान और अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला शुरू किया।
खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, जो पहले दो पैन कार्ड (dual PAN card) रखने के मामले में जेल में थे, उन्हें 29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई थी।
खान और उनके बेटे को 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहा किया गया, लेकिन जेल के बाहर इंतजार कर रही ED की टीम ने खान को हिरासत में ले लिया। ED की यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के संबंध में थी।
गाजियाबाद की एक विशेष 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) अदालत ने 1 नवंबर को खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इसके बाद, खान ने ED द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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Supreme Court asks Allahabad High Court to hear Azam Khan's plea against ED arrest on November 16