सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह Indiabulls से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ ED के सभी छह आरोपों की जांच करे

अदालत ने नागरिक व्हिसल ब्लोअर फोरम की याचिका पर निर्देश पारित किए, जिसमें इंडीबल्स और उससे जुड़ी संस्थाओं से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं, धन के दुरुपयोग और ऋणों के एवरग्रीनिंग का आरोप लगाया गया था।
Supreme Court of India
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को निर्देश दिया कि वह इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और उससे जुड़ी कंपनियों के ख़िलाफ़ एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) द्वारा उठाए गए सभी छह आरोपों की जांच करे।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने नोट किया कि ED की शिकायत में लगाए गए छह आरोपों में से पांच की जांच दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने की थी, और उसकी राय थी कि आगे जांच करना सही नहीं होगा।

कोर्ट ने देखा कि CBI छठे आरोप की और जांच करना चाहती थी।

इसके बाद, कोर्ट ने मुंबई के स्पेशल जज को निर्देश दिया कि वे CBI की आगे की जांच की अर्ज़ी पर 24 अगस्त के बाद दो हफ़्ते के अंदर फ़ैसला लें।

कोर्ट ने निर्देश दिया, "इसके बाद CBI सुप्रीम कोर्ट को प्रोग्रेस/स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी।"

इसके अलावा, कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह उन पांच आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से जांच करे जिनकी EOW पहले ही जांच कर चुका है, चाहे नतीजे कुछ भी हों।

कोर्ट ने आगे आदेश दिया, "CBI को निर्देश दिया जाता है कि वह ED की शिकायत में शामिल अन्य पांच आरोपों की जांच करे, चाहे दिल्ली पुलिस EOW की राय या रिपोर्ट कुछ भी हो, और कोर्ट को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।"

Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana
Chief Justice of India Surya Kant and Justices Joymalya Bagchi and V Mohana

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के सर्कुलर के मुताबिक, ₹50 करोड़ से ज़्यादा के बैंक फ्रॉड की जांच CBI से कराई जानी चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि ED की शिकायत में लगाए गए छह आरोपों से पहली नज़र में धोखाधड़ी, आपराधिक साज़िश, फंड का गलत इस्तेमाल और जनता के पैसे से दिए गए लोन की 'एवरग्रीनिंग' (पुराने लोन चुकाने के लिए नया लोन लेना) का पता चलता है।

इनमें से एक आरोप अमेरिकाप (Americorp) ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लगभग ₹1,693 करोड़ के लोन से जुड़ा था। भूषण ने कहा कि आरोप है कि लोन का पैसा घुमा-फिराकर इंडियाबुल्स (Indiabulls) की कंपनियों के शेयरों में लगाया गया, जिससे शेयर की कीमतों में हेरफेर करके मुनाफ़ा कमाया गया। उन्होंने 'पैलेस रॉयल' (Palais Royale) प्रोजेक्ट से जुड़े संदिग्ध लेन-देन और फंड के गलत इस्तेमाल के बारे में ED की जांच के नतीजों का भी ज़िक्र किया।

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Supreme Court directs CBI to examine all six allegations by ED against Indiabulls-linked entities

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