सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD के खिलाफ CBI के भ्रष्टाचार मामले में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई

कोर्ट ने पंजाब सरकार की उस याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत CMO के OSD पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच का निर्देश दिया गया था।
Bhagwant Mann and Supreme Court
Bhagwant Mann and Supreme Court Facebook
Published on: 
3 min read

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD (ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजबीर सिंह घुमन के ख़िलाफ़ हाल ही में दर्ज मामले में कोई भी सख़्त कार्रवाई करने से रोक दिया। यह मामला सरकार के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से जुड़ा है [पंजाब राज्य बनाम निखिल सराफ़]।

जस्टिस एमएम सुंदेश और पीबी वराले की बेंच ने पंजाब सरकार की अपील पर यह आदेश दिया। सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें OSD के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए CBI को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने आज सरकार की अपील पर CBI को नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने आदेश दिया, "नोटिस जारी किया जाए। इस बीच कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करना होगा।"

Justices MM Sundresh and PB Varale of Supreme Court
Justices MM Sundresh and PB Varale of Supreme Court

हालांकि, कोर्ट ने FIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा, "हम FIR पर रोक नहीं लगा रहे हैं। हम कह रहे हैं कि कोई भी ज़बरदस्ती वाला कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।"

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद, CBI ने हाल ही में घुमन, नितिन गोहल और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया। यह मामला दिल्ली में दर्ज किया गया है।

घुमन के खिलाफ यह मामला तब शुरू हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज करने को कहा।

ED के अनुसार, गोहल सरकार से फायदा चाहने वाले लोगों और घुमन के बीच बिचौलिए का काम करता था। ये आरोप ट्रांसफर, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियारों के लाइसेंस दिलाने और अन्य फायदों से जुड़े हैं।

पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने पर, वकील निखिल सराफ ने इस निष्क्रियता को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 5 अक्टूबर को CBI से अपनी जांच पर दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

हाई कोर्ट ने कहा कि ED द्वारा दी गई जानकारी से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि किसी ऊंचे सरकारी पद पर रहते हुए संज्ञेय अपराध (cognizable offences) किए गए हैं, जिससे जनहित को खतरा हो सकता है।

कोर्ट ने पाया कि 3 अगस्त को ED द्वारा जानकारी साझा किए जाने के बाद से पंजाब ने केवल "प्रारंभिक जांच" की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां कई लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, वहीं मान (Mann) के OSD को जांच में शामिल होने के लिए नहीं कहा गया था।

हाई कोर्ट ने आगे कहा कि ED द्वारा भेजी गई सामग्री में दोषी ठहराने लायक सबूत थे और राज्य पुलिस से ज़िम्मेदार जवाब की उम्मीद थी।

सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार का पक्ष रखा।

सीनियर एडवोकेट डीएस नायडू वकील निखिल सराफ की ओर से पेश हुए।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Supreme Court stays coercive action in CBI's corruption case against Punjab Chief Minister's OSD

Hindi Bar & Bench
hindi.barandbench.com