सुप्रीम कोर्ट केस लिस्टिंग और बेंच आवंटन में मानवीय भूमिका समाप्त करने के लिए AI का इस्तेमाल करेगा

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में रजिस्ट्री अधिकारियों के अंतर-विभागीय तबादलों की एक अभूतपूर्व लहर देखने को मिली है, जिसका उद्देश्य वर्षों से जमी हुई पुरानी व्यवस्था को खत्म करना है।
Supreme Court and AI
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एक ऐसे कदम के तहत, जो सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक कामकाज में एक अहम बदलाव ला सकता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक सॉफ्टवेयर अब शीर्ष अदालत में केस लिस्टिंग और बेंच आवंटन का काम संभालेगा, जिससे इस प्रक्रिया में इंसानी दखल प्रभावी रूप से खत्म हो जाएगा।

बार एंड बेंच को उच्च-स्तरीय सूत्रों ने बताया कि यह फ़ैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लिया।

अभी, मामले अलग-अलग बेंचों को CJI ही सौंपते हैं, जो 'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' होते हैं; इस अधिकार की वजह से CJI का पद काफ़ी बारीकी से जाँच के दायरे में आ जाता है।

ये सुधार एक अंदरूनी जाँच के बाद किए गए हैं, जिसमें रजिस्ट्री के भीतर दो तरह की कमियाँ सामने आई थीं - पहली, रजिस्ट्री के ऐसे अधिकारी जो लंबे समय से अपनी-अपनी जगहों पर जमे हुए थे; और दूसरी, पुरानी हो चुकी तकनीकी व्यवस्था, जिसकी आड़ में लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही चलती आ रही थी, जिसमें मामलों का अनियमित और ग़लत बँटवारा भी शामिल था।

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में अधिकारियों के एक विभाग से दूसरे विभाग में तबादलों की एक अभूतपूर्व लहर देखने को मिली है। इसका मकसद सालों से जमे अधिकारियों और व्यवस्था की कमियों को दूर करना है। इस महीने के आखिर से पहले तबादलों का दूसरा दौर भी होने की उम्मीद है।

इसकी शुरुआत तब हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच के सामने चल रही सुनवाई के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई। यह बेंच इरफ़ान सोलंकी की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1986' को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह कानून 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 111 के प्रावधानों के विपरीत है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि 'मोहम्मद अनस चौधरी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' मामले में भी लगभग इसी तरह की चुनौती दी गई थी, जिसे 12 दिसंबर, 2022 को ही तीन जजों की एक बेंच ने खारिज कर दिया था। उस बेंच में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता शामिल थे। उस समय कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह अपनी शिकायत लेकर किसी उचित मंच पर जाए।

उस याचिका के खारिज हो जाने के बावजूद, वैसी ही एक और याचिका सुनवाई के लिए एक नई बेंच के सामने आ गई।

CJI सूर्यकांत ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जताई। हालाँकि, वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने याचिका वापस लेने की गुज़ारिश की, लेकिन CJI सूर्यकांत ने निर्देश दिया कि यह याचिका कोर्ट में ही लंबित रहेगी और इसे तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जाएगा। इसके बाद CJI ने घोषणा की कि इस मामले में एक विस्तृत प्रशासनिक जाँच भी की जाएगी।

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Supreme Court to deploy AI to end human role in case listing, bench allocation

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